तारक मेहता का उल्टा चश्मा का जाना माना चेहरा और बिहार से निकल कर अपनी पहचान बनाने वाले कवि कुमार आजाद उर्फ हंसराज हाथी का निधन हो गया है. कवि कुमार आजाद का निधन हार्ट अटैक की वजह से हुआ है, और जिस समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा वे घर पर थे. 

शो से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कवि कुमार आजाद का आज सुबह ही प्रोड्यूसर के पास फोन आया था, और उन्होंने कहा था कि उनकी तबियत ठीक नहीं है इसलिए वे आज शो पर नहीं आ पाएंगे. लेकिन थोड़ी देर बाद ये बुरी खबर आ गई. शो से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वे तबियत खराब होने के बावजूद भी शो पर आते थे. वे शो से बहुत प्यार करते थे. ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ 10 साल पूरे करने जा रहा है, इसलिए आज सेट पर इसको लेकर एक मीटिंग भी थी. लेकिन उससे पहले ही ये बुरी खबर आ गई. 

कवि कुमार आजाद बॉलीवुड में भी हाथ आजमा चुके थे, और ‘मेला (2000)’ में नजर आए थे. इस फिल्म में उनके साथ आमिर खान भी थे. हालांकि कवि कुमार आजाद को असली पहचान ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से मिली. कवि कुमार आजाद के नाम से ही जाहिर है कि वे कवि थे, और जब वे एक्टिंग में मशगूल नहीं होते तो कविताएं लिखा करते थे. शो में वे पूरी गोकुल धाम सोसाइटी के साथ बहुत ही मिलनसारिता के साथ पेश आते थे. आइए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ अनसुनी बातें : डॉक्टर हंसराज हाथी का किरदार निभाने वाले कवि कुमार आजाद मूलरूप से बिहार के सासाराम स्थित गौरक्षणी के रहने वाले थे. 

कवि कुमार को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. जब वे युवा हुए तो उनका शरीर बेढब तरीके से बढ़ने लगा. इसके बाद भी उन्होंने एक्टिंग के शौक को मरने नहीं दिया.एक्टिंग के साथ ही कवि कुमार को कविताएं लिखने का भी शौक था. नामी कॉमेडियन टुनटुन एक बार बिहार के सासाराम आए थे तो उन्होंने कवि कुमार को देखते ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वह एक्टर बनेंगे. यह बात बाद में सच साबित हुई.कवि आजाद ने दिल्ली में अभिनय की ट्रेनिंग ली. इसके बाद वो मुंबई पहुंचे जहां उन्हें कदम कदम पर संघर्ष करना पड़ा. कवि आजाद जब घर से निकले तो उनकी जेब में फूटी कौड़ी नहीं थी. घर की हालत ठीक नहीं थी. पिताजी को व्यापार में नुकसान हो गया था. घर वाले एक्टिंग में जाने के खिलाफ थे. इस वजह से उन्हें कई रात मुंबई की सड़कों पर गुजारनी पड़ी.

साल 2000 में उन्हें फिल्म मेला में सुपरस्टार आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला. इसके अलावा उन्होंने फंटूश, ड्यूड्स इन द टेन्थ सेंचुरी जैसी फिल्मों में भी काम किया है.साल 2008 में टीवी सीरियर तारक मेहता का उल्टा चश्मा में निर्मल सोनी के डॉक्टर हाथी का किरदार छोड़ने के बाद कवि आजाद को यह रोल मिल गया.कवि आजाद निजी जिंदगी में बेहद भावुक और संवेदनशील इंसान हैं. छुट्टियों के दिनों में कवि कुमार आजाद जरूरतमंद बच्चों क साथ वक्त गुजारते हैं.उनका अचानक इस तरह से चले जाना ना सिर्फ अभिनय जगत के लिए एक क्षति है बल्कि पूरे बिहार के लिए एक सदमे जैसा है.

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