भोजपुर जिले के रहने वाले शिवम ने महज 15 साल की उम्र में ही आईआईटी एग्जाम क्वालीफाई कर लिया। शिवम को जेईई एडवांस परीक्षा में 383 रैंक हासिल हुआ है। उसे 360 में से 241 अंक प्राप्त हुए हैं। शिवम इसका श्रेय अपने शिक्षकों और और बड़े भाई के देते हैं। शिवम ने इसके साथ ही केवीपीवाई(किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना) परीक्षा में क्वालीफाई किया है। शिवम बड़हरा प्रखंड का बखोरापुर गांव के रहने वाले हैं।

शिवम का कहना है कि 9वीं में ही तय कर लिया था कि आईआईटी एग्जाम क्वालीफाई करना है। शिवम ने बताया कि मैं 5 साल की उम्र में ही कोटा चला गया था। बड़े भाई को परीक्षा की तैयारी करते देखता था और उनसे लगातार टिप्स लेते रहता था। भाई के गाइडेंस ने भी आईआईटी क्वालीफाई करने में बहुत मदद की। शिवम ने बताया कि वह कोचिंग के अलावा 8 से 9 घंटे सेल्फ स्टडी किया करते थे।

उसने कोटा में रहकर आईआईटी की तैयारी की थी। शिवम ने बताया कि रेजोनेंस इंस्टीट्यूट से मिलने वाले स्टडी मेटरियल के अवाला फिजिक्स में एचसी वर्मा का न्यूमेरिकल हल करते थे। उनका इरादा आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने का है। वह बताते हैं कि बचपन से ही मैथ्य और फिजिक्स में रुचि थी। शिवम को 12वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं।

शिवम ने पहले अटेम्पट में ही आईआईटी क्वालीफाई करने पर घरवाले खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। शिवम की मां प्रमिला देवी का कहना है कि मेरे बेटे ने मेरा नाम रौशन कर दिया है। हमलोग बच्चे की सफलता से बहुत खुश हैं।

पिता सिद्धनाथ सिंह का कहना है कि जिसके दोनों बच्चे आईआईटी क्वालीफाई कर जाएं उससे ज्यादा खुशी किसे होगी। हर मां-बाप की चाहत होती है कि उनके बच्चों की वजह से समाज में उनका नाम हो। मेरे दोनों बच्चों ने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। आज हम कितना खुश हैं इसे शब्दों में नहीं बता सकते।

शिवम के बड़े भाई सत्यम ने भी महज 12 साल की उम्र आईआईटी क्वालीफाई कर लिया था। सत्यम ने साल 2012 में आईआईटी परीक्षा पास कर ली थी लेकिन रैंक अच्छा नहीं होने की वजह से 2013 में फिर आईआईटी की परीक्षा दी। 2013 में उसे 679 रैंक हासिल हुआ था। सत्यम का कहना है कि सेल्फ स्टडी के साथ साथ टीचर की गाइडेंस पर ध्यान दिया जाए तो आईआईटी परीक्षा पास करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।

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