CBSE के 10वीं की परीक्षा में मुंगेर की सौम्या शर्मा ने बिहार में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। सौम्या को 500 में 495 अंक मिले हैं। वह माता-पिता की तरह ही डॉक्‍टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती है। उसके अनुसार नियमित व ईमानदार पढ़ाई से सफलता जरूर मिलती है। सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता है।

पिता बोले, बेटी पर है गर्व

सौम्‍या के माता पिता मुंगेर के प्रसिद्ध चिकित्सक हैं। मां डॉ. सुनंदा  स्‍त्री रोग विशेषज्ञ हैं तो पिता डॉ. अनिल ठाकुर शिशु रोग विशेषज्ञ। सौम्या दो बहन है। छोटी का नाम आराध्य शर्मा है। अपनी बेटी की सफलता पर सौम्या के पिता डॉ. अनिल ठाकुर ने कहा कि  सौम्या और आराध्या को वह बेटे के रूप में ही देखते हैं। उन्हें बेटा नहीं होने का कभी मलाल नहीं हुआ। आज बिटिया ने सिर गर्व से उंचा कर दिया।

‘माता-पिता की प्रेरणा व शिक्षकों के सहयोग से मिली सफलता’

अपनी सफलता पर सौम्या ने कहा कि उसने इंटरनेट पर रिजल्ट देखा। इसके बाद पापा-मम्मी का फोन आया कि मेरा नाम स्टेट के टॉपर लिस्ट में तीसरे स्थान पर है। यह खबर सुनकर खुशी से उछल पड़ी।

सौम्या ने कहा कि उसने नेट्रोडेम मुंगेर में पढ़ाई की। मम्मी-पापा हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे। कभी भी बेटी होने का एहसास नहीं होने दिया। वह अक्सर कहा करते थे, जिसमें तुम्हारा मन लगे, वही करो। माता पिता की प्रेरणा और शिक्षकों के सहयोग के कारण ही सफलता मिली।

ईमानदार प्रयास से जरूर मिलती सफलता

सौम्या ने कहा कि सफल होने के लिए पहले लक्ष्य तय करना होता है। लक्ष्य तय करने के बाद अगर ईमानदारी से प्रयास किया जाए तो कभी असफलता हाथ नहीं लगती है। इसके अलावा बच्चों की हॉबी पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए। इससे दिमाग शांत रहता है। सौम्या ने कहा कि उसका पहला लक्ष्य समाज सेवा है। वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है।

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