पटना: कोलकाता का हावड़ा ब्रिज अपनेाआप में ही एक पहचान है। इस पुल को 75 साल का हो गए। दुनिया का यह छठवां सबसे बड़ा और सबसे बिजी कैंटीलीवर ब्रिज है।    इस पुल की खास बात है कि ये एक भी नट-बोल्ट के बना है। इसका पूरा आकार रिबेट से जोड़ा गया है। यह 1939 में बनना शुरू हुआ और 1943 में 3 फरवरी को जनता के लिए खोला गया।

1964 में इस ब्रिज का नाम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर रवींद्र सेतु कर दिया गया। इस ब्रिज को बनाने में उन दिनों 333 करोड़ रुपए की लागत आई थी।

पहली बार 1862 ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुल बनाने का फैसला लिया और इसकी जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर जॉर्ज टर्नबुल की सौंपी थी।

पुल बनाने के लिए 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया। हर दिन इस ब्रिज से करीब 1 लाख गाड़ियां और 1.5 लाख लोग पैदल जाते हैं।

इसकी डिजाइन ब्रिटिश डिजाइनर रेंडेल, पामर और ट्राइटन ने तैयार की थी। 705 मीटर लंबे और 21.6 मीटर चौड़े पुल पर फिल्म भी बन चुकी है।

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