अंग्रेजी! जो की एक बहुत ही बेमिसाल एवं कमाल की भाषा है
और हो भी क्यों न! इस भाषा का ज्ञान जिस किसी को भी है वो आज मेघावी लोगों में गिने जाते हैं। उनको लोग एक अलग नजरिये से देखते हैं! लोग इज्जत थोड़ी ज्यादा मात्रा में देते हैं कि भाई इ आदमी बहुते बढ़िया अंग्रेजी बोलता हैं!! मने बहुत पढ़ा-लिखा होगा।
मतलब अंग्रेजी का ज्ञान आपको एक अलग पहचान दिलाता है।

यूँ तो बिहार में अंग्रेजी अनिवार्य नहीं है। बिहारियों को लोग एक अजीब सी नजरिये से देखते हैं जैसे अगर अंग्रेजी गाने न सुनता हो तो वो बन्दा बिहारी होगा! अगर अंग्रेजी न बोलता हो तो वो बन्दा बिहारी होगा। क्योंकि उनके नजर में हम बिहारी लोग अंग्रेजी नहीं बोलते!
हम देशी गवार और जाहिल हैं!
लेकिन उन्हें नहीं पता है कि अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल हमारे गाँव के चौक पर बैठे रामजी काका से ले कर घर में पड़ी बुढ़ी कलावती चाची तक रोज सुबह से शाम तक करती हैं।
रोज हमारे गाँव के बच्चे अंग्रेंजी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

तो चलिए जानते हैं कैसे:-
“गाँव तो हमसब गए होंगे! और गाँव में किसी का घर पूछने पर गाँव के किसी काका के मुँह से ये सुना जरूर होगा की
“ए बाबु! फलाना के घर “”नियरे”” बा!! ओहिजा से चल जा। चहुँप जाइबअ।”
उनके कहने का मतलब
आप जिनका घर पूछ रहे हैं, उनका घर “नियरे” (NEAR-नजदीक) है|

गांव के किसी चाची से सुना होगा
“इ बबुआ तनी डॉक्टर की एहा चहुपा द!
यहाँ भी 80 वर्ष की वृद्ध महिला डॉक्टर जो की एक अंग्रेजी शब्द है उसका इस्तेमाल करती है।”

बबुआ तानी “फ़ोन क़ द!, बबुआ तनी रिचार्ज करवा द!
मोबाइल द! ये सब अंग्रेजी के शब्द हैं जिनका इस्तेमाल हम अपने बड़े बुजुर्गों के द्वारा सुनते आ रहे हैं।

मेरे कहने का ये मतलब है कि
जरुरी नहीं की हर बिहारी बाहरी सभ्यता को अपना ले!
जरुरी नहीं की हर बिहारी
Yo bro! Whats up dude! ये सब बोले।
बिहारी अपने सभ्यता एवं संस्कार को भली भांति समझता है। इसलिए चुपचाप सुन लेता है।
” हम अपने दम पर पहाड़ का सीना चिरने की ताकत रखते हैं,
वो अलग बात है की अंग्रेजी हमारे बूढ़े बुजुर्ग बोलते आ रहें हैं।
बिहारी को कम मत आंकिये!
क्योंकि
“एक बिहारी! सब पर भारी”

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