आज हम आपको कुछ ऐसी ही बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें हम कई वर्षों से सुनते आ रहे हैं. लड़कों को अगर ये बातें बचपन से ही सिखाई जाएगी, तो हम महिलाओं के लिए एक भयमुक्त समाज की कल्पना कर सकते हैं:

01. जितनी इज़्ज़त अपनी मां-बहन की करते हो, दूसरे की मां-बहन की भी करो !

हर लड़के को ये चीज़ ध्यान में रखनी चाहिए कि जितनी इज़्ज़त वो अपनी मां-बहन की करता है, उतनी ही इज़्ज़त दूसरे की मां-बहन की भी करे.

02. लड़का और लड़की में फ़र्क करना !

लड़का सिर्फ़ एक तरह के काम करेगा और लड़की सिर्फ़ एक तरह के…. इस सोच पर विराम लगा दें. लड़के को हर तरह के काम करने दें और सिखाएं.

03. मर्द को भी दर्द होता है !

मर्द किसी दूसरी मिटटी के नहीं बने होते जो उन्हें दर्द न हो. मर्द हो या औरत, दर्द सभी को होता है.. इस लिए जब लड़के को चोट लगे तो उसे रोने से ये कह कर मत रोको की वो मर्द है, उसे दर्द नहीं होना चाहिए…

04. ख़ुद के सपनों को पूरा करने के लिए लड़कों के सपनों का गाला घोंटना !

अकसर देखा जाता है कि मां-बाप बेटों पर अपने किसी अधूरे सपने को पूरा करने या पडोस वाले गुप्ता जी के बेटे की तरह डॉक्टर या इंजीनियर बनाने का दबाव बनाते हैं. लड़कों को अपने सपने जैसे पूरे करने हों उनको करने दें. बच्चे की मर्जी के बिना किसी के डॉक्टर या इंजीनियर बेटे को देखकर अपने बच्चे को भी उसी की तरह बनाना सही नहीं है.

05. अच्छी नौकरी नहीं करेगा तो कल के दिन तुझे कौन अपनी लड़की देगा?

हर पेरेंट्स अकसर ये डायलॉग अपने बेटे को मरते हैं. आप क्यों उसे प्रेशर में डाल रहे हैं कि सिर्फ़ नौकरी कर के ही वो शादी के क़ाबिल हो जायेगा? यही बात कोई लड़कियों को क्यों नहीं बोलता. उसे भी अपने पैरों पर खड़े होने की ज़रुरत है.

06. बेटा पिंक कलर लड़के नहीं पहनते !

हमारे पेरेंट्स बचपन में ही हमें लड़के होने का एहसास करा देते हैं. बचपन में गलती से अगर कोई पिंक शर्ट या टी-शर्ट पसंद कर लेते थे तो पेरेंट्स या बड़े भाई-बहन तुरंत टोक दिया करते थे. ये क्या लड़कियों वाला कलर पसंद किया है? ग्रीन कलर देख, लड़के ग्रीन ही पहनते हैं. कलर आपको लड़का या लड़की नहीं बनाते.

07. बुढ़ापे में मां-बाप को तुमने ही तो पालना है, लड़की तो पराया धन होती है !

लड़के और लड़कियों दोनों की ज़िम्मेदारी है बुढ़ापे में अपने मां-बाप की देख-रेख करना. फिर सारा प्रेशर लड़के पर ही क्यों?

08. घर का काम लड़का भी कर सकता है !

आज के दौर में ये ज़रूरी नहीं है कि घर काम सिर्फ़ लड़कियां ही करें. जो काम लड़की करती है वो लड़का भी कर सकता है. लड़के को एहसास दिलाएं कि घर के काम सिर्फ़ लड़कियों के करने के लिए ही नहीं होते.

09. किसी रिश्तेदार के घर जाना हो, तो भी लड़के को ही भेजा जाता है !

बचपन से हम देखते आये हैं कि अगर किसी रिश्तेदार के घर कुछ काम से जाना भी होता था तो पेरेंट्स सबसे पहले बेटे को ही वहां जाने के लिए कहते थे. लड़कियां को भेजने में कौन सी दिक्कत आ जाती है ये समझ से परे है.

10. मर्द होकर इतना कम खाते हो?

ज़रूरी नहीं कि वो लड़का है तो ज़्यादा ही खायेगा या सिर्फ़ क्रिकेट ही पसंद करेगा. बच्चों पर ऐसी अवधारणायें थोपनी बंद करें.

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