जलियांवाला बाग याद है आपको? अमृतसर का वही बाग, जो हज़ारों बेकसूर लोगों की हत्या का गवाह बना था।

यही वह कुआं है, जिसमें आज से ठीक 98 साल पहले, 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के दौरान अपनी जान बचाने के लिए जाने कितने लोग कूद गए थे। उनमें आदमी थे, और औरतें भी, बच्चे थे और बूढ़े भी। उस नरसंहार के बाद इस कुएं से 120 शव निकाले गए थे।

जलियांवाला बाग में जनरल डायर के इशारे पर हुए नरसंहार के ठीक बाद का दृश्य।

नरसंहार के कुछ दिन बाद दीवारों पर गोलियों के निशान दिखाते लोग।

हत्याकांड के बाद बाग के बाहर तैनात किए गए सिपाही।

अभी भी बाकी हैं उन गोलियों के निशान, इन दीवारों पर भी, और लोगों के दिलों पर भी।

उस भयानक दिन के एक-एक लम्हे की छाप है यहां।

यहां से चली थीं मासूम लोगों पर गोलियां।

यह तस्वीर उस शहीदी कुएं पर बने स्मारक की है, जिसमें लोग अपनी जान बचाने के लिए कूदे थे।

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