ये कहानी उस महिला है, जिसके पति आईएएस हैं। 15 साल बाद जब ये महिला अपने ससुराल आई तो उस गांव की हालत देखकर परेशान हो गई। आईएएस के गांव में ना तो बिजली थी और ना ही सड़क। ऋतु जायवाल नाम की इस महिला ने गांव की तस्वीर बदलने की ठान ली।
यह कहानी है बिहार के सीतामढ़ी जिले के सिंघवाहिनी पंचायत की। इस महिला ने पहले गांव में मुखिया का चुनाव जीता और फिर लग गई गांव के विकास में।

ias-s-wife-is-the-village-s-dubious-chief

 

लेकिन विकास की राह इतना आसान भी नहीं थी। गांव में एक-एक इंच जमीन के लिए विवाद हो रहा था। सड़क के लिए जमीन तक नहीं मिल रही थी। लेकिन ऋतु ने हार नहीं मानी और गांववालों को समझा-बुझाकर रास्ता बनवाया। ऋतु काम की निगरानी खुद कर रही थी, ताकि कोई दिक्कत ना आए। इसके बाद ऋतु ने गांव में बिजली लाने का काम किया।

 

साल 1995 में ऋतु जायसवाल की शादी आईएएस अरुण कुमार से हुई थी। लेकिन वो कभी अपने ससुराल नहीं आई थी। 15 सालों तक वो अपने पति के साथ थीं, जहां भी उनकी पोस्टिंग होती, वो उनके साथ जातीं। जब एक बार ऋतु अपने ससुराल नरकटिया गांव आई तो वहां की हालत देखकर वो दंग रह गई। गांव में घुसने से पहले ही उनकी कार कीचड़ में फंस गई। इसके बाद ऋतु बैलगाड़ी से गांव पहुंची।

ias-s-wife-is-the-village-s-dubious-chief
इससे परेशान ऋतु गांव में रहने का फैसला किया और गांव की लड़कियों को पढ़ाने लगी। साल 2015 में गांव की 12 लड़कियां पहली बार मैट्रिक पास की। साल 2016 में ऋतु ने सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनी। चुनाव में 32 उम्मीदवार थे। लोगों ने कहा कि गांव में तुम्हारी जाति के 5 परिवार हैं, तुम चुनाव हार जाओगी। लेकिन इसके बावजूद ऋतु ने चुनाव लड़ा।
ऋतु की मेहनत से साल 2016 में पंचायत खुले में शौच फ्री हो गया। इस पंचायत में 7 टोले हैं। अब ज्यादातर टोलों में पीसीसी सड़क बन गई है। हर टोले में बिजली पहुंच गई है। 150-150 के ग्रुप बनाकर पंचायत के बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है। इसमें पढ़ाने वाली गांव की लड़कियां ही हैं। ऋतु को सबसे ज्यादा शिक्षित मुखिया का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

गांव की लड़कियों को सिखाया कम्प्यूटर
– 150-150 के ग्रुप बनाकर पंचायत के बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है। पढ़ाने वाली गांव की ही लड़कियां हैं।
– पहले मैंने 20 लड़कियों को ट्रेंड किया था। अकेले लोगों को जागरूक करना संभव न था। इसके बाद कम्प्यूटर ट्रेनिंग दिलाई। ये सब बच्चों को कम्प्यूटर सिखा रही हैं। कई लड़कियां महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं। इसके लिए सरकार से लेकर एनजीओ तक का सहयोग लिया जा रहा है।
– गौरतलब है कि रितू को उच्च शिक्षित मुखिया का अवार्ड भी मिल चुका है। इसके साथ ही उन्हें पंचायत के विकास के लिए भी कई अवार्ड मिले हैं।

एक-एक इंच जमीन छोड़ने को तैयार नहीं थे ग्रामीण
– रितू ने बताया गांव की मुख्य सड़क बनाने के लिए कई बार टेंडर हुआ। कुछ असामाजिक तत्व अड़ंगा लगाने लगे, जिससे टेंडर कैंसिल हो गया। अब फिर से काम शुरू हुआ है।
– इस दौरान गांव के लोग सड़क के लिए अपनी एक-एक इंच जमीन छोड़ने को तैयार न थे।
– लोगों को समझाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। मैंने बताया कि अगर सड़क नहीं बनेगी तो गांव का कैसे विकास होगा। आप के बच्चे कैसे गांव से बाहर जाएंगे। आप खेती करते हैं। उसको बाजार में बेचेंगे तो अधिक पैसा मिलेगा। गांव के बीमार लोग जब गांव से बाहर नहीं जाएंगे तो कैसे इलाज होगा। इन बातों का असर लोगों पर हुआ और वे एक-एक कर जमीन देने को तैयार हुए।

ritu-jaiswal-mukhiya-bihar

पंचायत हुआ खुले में शौच मुक्त
– रितू बताती हैं कि सिंघवाहिनी पंचायत 2016 में खुले में शौच जाने से मुक्त हो गया था। इस पंचायत में 7 टोले हैं।
– कई टोले में पीसीसी सड़क बन गई है। चापाकल नल और बिजली पहुंच गई है। 40 साल से मेरे पंचायत में सिर्फ कागज पर बिजलीकरण हुआ था। अब गांव में बिजली पहुंच गई है।

ritu-jaiswal-ias-wife
हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here