कहने को यह भारत के सबसे अमीर जमींदार का आखरी महल है, लेकिन हिंदुस्तान  को इसने बहुत कुछ पहली बार दिखाया। यह भारत का पहला भूकंपरोधि महल है। डच वास्‍तुशैली में बने इस महल को प्रसिद्ध वास्‍तुकार सह अभियंता फेलचर, हेय और रिड ने सामूहिक रूप से किया था। महाराजा कामेश्‍वर सिंह ने इसका निर्माण 1934 में आये भूकंप के बाद क्षतिग्रस्‍त छत्र निवास पैलेस के स्‍थान पर कराया था। इस महल में एक भी ईंट का प्रयोग नहीं हुआ है

यह पूरा महल सीमेंट के मजबूत खंभों और दीवारों से बना है। यह भारत का पहला महल है जो पूर्णत: वातानुकुलित था। यह देश का इकलौता पैलेस है, जिसके परिसर में रेलवे स्‍टेशन है। इस पैलेस की सबसे बडी खूबी इसका डिजाइन है, यह तितली जैसा है। जिसके तहत यह दो दिशाओं से देखने में एक समान लगता है और हर कमरा सीधा सामने की ओर खुलता है। 1941 में तैयार हुए डज वास्‍तुशैली के इस 89 कमरोंवाले दो मंजिले पैलेस में कुल 14 महाराजा सूट है, जो विभिन्‍न राज्‍यों के स्‍थापत्‍य शैली से सुसज्जित है। इन सूइट में एक नेपाल के राजा का भी है, जिसमें नेपाल नरेश त्रिभुवन रात गुजार चुके हैं। कहा जाता है कि नेपाल नरेश देश की सीमा के बाहर रात नहीं गुजारा करते थे। पहली बार नेपाल के किसी राजा ने राज्‍य की सीमा के बाहर इसी महल में रात गुजारी थी। इससे पहले नेपाल के राजा रात अपनी सीमा में ही गुजारते थे। वैसे बीकानेर केे महाराजा गंगा सिंह इस महल में ठहरनेवाले पहले राज अतिथि थे। वो 1939 में दरभंगा प्रवास के दौरान इसी महल में ठहरे थे।


दो लिफ्ट की सुविधावाले इस महल में पहली बार प्‍लास्‍टर आफ पेरिस का प्रयोग हुआ था। इटेलियन मारवल, चीनी मोहबनी (टीक) और बेलजियम ग्‍लास से बने इस महल को बिहार का व्‍हाईट हाउस भी कहा जा सकता है। कई प्रकार के कमरोंवाले इस महल में उत्‍तर भारत का इकलौता बॉल डांस हॉल है, जिसमें आवाज की गूंज राष्‍ट्रपति भवन के अशोक हॉल से भी कम है। इस महल में दो तरणताल हैं, जिनमें से एक गरम पानी वाला तरणताल पैलेस के अंदर है और वह बिहार का पहला तरणताल है।

इस तरणताल में जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह और नेपाल के राजा त्रिभुवन समेत कई एतिहासिक हस्तियों के स्‍नान करने की बात कही जाती है। लांग टेनिस, बैडमिंटन से लेकर कई प्रकार के खेलों के लिए परिसर में आधारभूत संरचना बनायी गयी हैं। इसके अलावा एक जैविक उद्यान भी, जिसको दुनिया के प्रसिद्ध बागवान चाल्‍स मैरीज की देख रेख में छत्र विलास पैलेस के दौरान ही विकसित किया था। इसमें करीब 40 हजार पेड लगे थे।

चंदन समेत कुछ ऐसी प्रजातियों के पेड भी यहां लगोय गये, जो बिहार ही नहीं अपितु एशिया में केवल यहीं थे। इन पेडों को लगाने के लिए न केवल बाहर से पौधे मंगाये गये बल्कि बाहर से माटी भी मंगायी गयी। इस महल के पास एक और रिकार्ड है, वो यह है कि भारत के राष्‍ट्रपति राज्‍य के अतिथि होते हैं। लेकिन आजादी से लेकर अब तक केवल एक बार राष्‍ट्रपति किसी के निजी मेहमान बने है। वो राष्‍ट्रपति थे राजेंद्र प्रसाद।

भारत के राष्‍ट्रपति को निजी तौर पर ठहराने का सौभाग्‍य भी केवल इसी पैलेस को मिला हुआ है। यह महल एक जमींदार ने जरूर बनाया था, लेकिन इसमें संविधानसभा के सदस्‍य, राज्‍यसभा में बिहार के प्रतिनिधि और बिहार के सबसे बडे उद्योगपति डॉ कामेश्‍वर सिंह रहते थे। यह महल निश्चित रूप से देश के अन्‍य महत्‍वपूर्ण महलों की तरह आम जनता के लिए उपलब्‍ध होना चाहिए था। इस आधारभूत संरचना का लाभ दरभंगा में पर्यटकों को लुभाने के लिए भी किया जा सकता था, लेकिन इस महल को 1975 में बिहार सरकार ने एक गलत काम के लिए खरीद लिया। संप्रति यह ललित नारायण मिथिला विश्‍वविद्यालय के अधीन है। आइये हम हैदराबाद चल कर फलकनुमा पैलेस देखें।

यह पूरा महल सीमेंट के मजबूत खंभों और दीवारों से बना है। यह भारत का पहला महल है जो पूर्णत: वातानुकुलित था।

भारत को गौरवानित करती ये महल जो दरभंगा बिहार में स्थित है
1, देश का पहला Fully Air conditioner महल
2, भारत का पहला महल जिसके कैम्पस में रेलवे प्लेटफार्म बना
3, भारत का पहला महल जिसमे लिफ्ट ऊपर आने जाने के लिए लगा था ( आपको बता दे देश का पहला लिफ्ट भी दरभंगा महाराजा ने ही काशी (बनारस) घाट पर लगवाया था जिसमे बैठकर महारानी दरभंगा महल से बैठकर सीधे माँ गंगा घाट पर उतरती थी गंगा स्नान के लिए)
4, भारत का पहला महल जिसमे राष्ट्रपति व्यक्तिगत अतिथि बने
4, भारत का पहला महल जहाँ विदेशों से मिटटी बृक्ष लगाने के लिए , औत महल के लिए PoP, टाइल्स मंगवाया गया
5, देश का पहला महल है जो भारत के सबसे ताकतवर और नेताओ और अधिकारियो को अपना अतिथि बना चुकी है जिसमे ,जवाहरलाल नेहरु से लेकर इंद्रा गाँधी तक का नाम है

credit- kumud-kahin

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