मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समीक्षा यात्रा निकाली है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चंपारण से की थी। समीक्षा यात्रा निकलने का मुख्य मुद्दा है राज्य के ऊपर एक बार नजर दौड़ाना! सरकार को एक बार जांच पड़ताल करनी है कि राज्य में हर व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है कि नहीं। इसके साथ ही इसका उद्देश्य यह भी कि सरकार द्वारा निर्देशित योजना का असर राज्य में कितनी संजीदगी से हो रहा है।

मुख्यमंत्री इस यात्रा में लोगों से बिहार को बाल विवाह और दहेज मुक्त बनाने के अभियान में शामिल होने का अनुरोध भी करने वाले थे। नीतीश के मन मुताबिक तो यह यात्रा निकल ही रही थी लोगों का समर्थन भी उन्हें मिल रहा था। मगर समर्थन के साथ साथ नीतीश को काले झंडे के दर्शन भी हो गए !

मुख्यमंत्री को लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा। जानकारी के अनुसार मधुबनी में समीक्षा यात्रा के दौरान वित्त रहित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए।मुख्यमंत्री ने जैसे ही अपने भाषण की शुरुआत की वैसे शिक्षक काले झंडों के साथ उनका विरोध करने लगे।

समीक्षा यात्रा पर राजद पार्टी ने भी करारा तंज कसा हैं। राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद ने समीक्षा यात्रा को घोटाला यात्रा कहा है। वहीं उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने समीक्षा यात्रा को झांसा यात्रा करार दिया है।अभी समीक्षा यात्रा के कई पड़ाव बाकी है। हो सकता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को समर्थन के साथ साथ विरोध आगे भी भी झेलना पड़े।

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