बिहार की बिटिया भावना कंठ को कौन नहीं जानता। भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर उन्होंने बिहार का नाम रौशन किया।

दरभंगा जिला अंतर्गत घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव की मूल निवासी भावना कंठ हैदराबाद स्थित एयरक्राफ्ट एकेडमी में फाइटर प्लेन उड़ाने का प्रशिक्षण लिया और आज वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हो गयी।

दरभंगा की बिटिया भावना कंठ की इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है। साथ ही उनके पैतृक गांव बाउर में भी जश्न का माहौल है। भावना भारतीय वायु सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत पायलट के रूप में नियुक्त हुई हैं।

भावना की पैदाइश बेगूसराय जिले के बरौनी रिफाइनरी में हुई। उनके पिता तेज नारायण कंठ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में इंजीनियर और मां गृहणी है। बरौनी रिफाइनरी के डीएवी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई करने के बाद भावना ने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज से बीटेक की डिग्री हासिल की।

उनके दादा बौद्ध नारायण कंठ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की बरौनी रिफाइनरी में इलेक्ट्रिशियन थे। वर्ष 2015 में उसका चयन भारतीय वायु सेना के लिए हो गया था।

भारतीय वायुसेना से अपने जुड़ाव पर उनका कहना है कि वो बचपन से ही पक्षी की तरह उड़ना चाहती थीं और अब फ़ाइटर पायलट के तौर पर देश की सेवा करना चाहती हैं।

देश की शान पहली महिला जेट फाइटर प्लेन को उड़ाने वाली भावना कंठ के पिता तेजनारायण कंठ हैं। बाप-बेटी का रिश्ता ऐसा जिसमें पिता को बेटी पर नाज है तो बेटी ने पिता के सपने को सच कर दिखाया है।

पिता ने ने कहा कि बेटी ने फादर्स डे पर अपनी अभूतपूर्व उपलब्धि का जो तोहफा दिया है, वह ताउम्र याद रहेगा। मां भी कहती हैं कि अब वे भावना की मां के नाम से जानी जाती हैं। इससे बड़ी खुशी और क्या होगी?

पिता को अपनी परवरिश पर नाज
बिहार की बेटी भावना कंठ शनिवार को देश की पहली तीन महिला फाइटर प्लेन पायलट्स में शामिल हो गईं। ‘दैनिक जागरण’ से खास बातचीत में भावना के पिता की आंखों में बेटी के लिए गर्व की झलक स्पष्ट दिखी।

उन्होंने कहा कि आज उन्हें अपनी परवरिश पर नाज है। उन्होंने कहा, मैंने देश को पहली महिला फाइटर पायलट को देकर देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाया है।

खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटी की वजह से उनका नाम भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। अब बच्चों से सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में पूछा जाएगा कि देश की जेट फाइटर विमान उड़ाने वाली पहली महिला कौन तो जवाब में लिखा जाएगा…भावना कंठ।

बचपन से बनना चाहती थी पायलट
तेजनारायण कहते हैं, ‘मेरी बेटी बचपन में मुझसे पूछती थी कि लड़कियां एनडीए में क्यों नहीं जातीं? मैं पायलट बनना चाहती हूं, कैसे बनूं?’ उन्होंने बताया, ‘मैंने कहा था कि बेटा, एनडीए ही नहीं …और विकल्प हैं। तू बड़ी हो जा, फिर पायलट बन जाना।’

साबित किया कि पापा की बेटी है
बोलते-बोलते आंखें भर आईं। ये खुशी के आंसू थे। रूंधे गले से कहा, ‘उसने उसी दिन कहा था कि मुझे पायलट बनना है। मैंने कहा था कि उसके लिए बहुत मेहनत करनी होगी। आज उसने अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि वो अपने पापा की बेटी है।’

नहीं किया बेटा-बेटी में फर्क
तेजनारायण कंठ दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड स्थित बाउर गांव के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी तीन संतानों में भावना बड़ी है। बचपन से ही मेधावी रही है। कुछ अलग करने का उसे शौक रहा है।

कहा कि हमेशा ही उसका हौसला बढ़ाया। कभी यह नहीं सोचा कि बेटी है, यह काम कैसे कर सकती है? आज वही लड़की पायलट की कड़ी ट्रेनिंग से गुजरकर फाइटर प्लेन उड़ाएगी।

अब पंख फैलाकर भरेगी उड़ान
पिता कहते हैं कि भावना ने अपनी कड़ी मेहनत, निष्ठा और जिद को पूरा कर देश व राज्य के साथ-साथ अपने समाज का नाम रोशन किया है। आज लग रहा है कि एक बाप ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है। अब भावना दूर आसमान में अपने पंख फैलाए उड़ेगी और हम नीचे से उसे निहारेंगे।

मां बोली, बेटी ने निभाया वादा
बातचीत के दौरान मां ने बताया कि भावना बचपन से ही पढऩे में अव्वल रही। कभी भी शिकायत का मौका नहीं दिया। घर में भले ही भाई-बहनों से खूब लड़ती-झगड़ती थी, लेकिन बाहर बिल्कुल शांत व धीर-गंभीर रही। बच्चों सा स्वभाव है उसका। आज मुझे अपनी बेटी पर गर्व है। उसने अपनी मां से किया वादा निभाया है।

नन्हीं सी बच्ची हो गई बड़ी
मां ने कहा, ‘मैं डरती थी कि वह कैसे इतनी कड़ी ट्रेनिंग को पूरा करेगी। लेकिन, उसका आत्मविश्वास देखकर डर खत्म हो जाता था।

आज लग रहा है कि मेरी नन्हीं सी बच्ची आज इतनी बड़ी हो गई कि जेट फाइटर प्लेन उड़ाएगी।’ कहा कि आज वे भावना कंठ की मां के नाम से जानी जाती हैं। एक मां के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या होगी?

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