हमारे सामने ज़िन्दगी में कुछ उदाहरण ऐसे आते हैं जिसपर यकीन करना बहुत मुश्किल होता है। आजादी के सत्तर वर्षों के बाद भी हम जो नहीं कर पाये किसी 20 साल के लड़के ने सालभर में करके दिखाया है। स्वच्छ भारत अभियान के मिशन को पूरा करने के लिये पूरे देश में शौचालय बनवाया जा रहा है लेकिन देखा जाये तो अभी हम अपने लक्ष्य से बहुत दूर हैं। लेकिन कुछ लोग हैं जो लक्ष्य तक पहुंचाने की ठान चुके हैं। हम बात कर रहे हैं बीस वर्षीय अभिषेक सिंह की।

नवादा जिले के सैदापुर पंचायत के निवासी अभिषेक सिंह आज के युवा वर्ग के लिए एक प्रेरणा हो सकते हैं। 20 वर्ष की अल्पायु परंतु समाज के प्रति उनकी निष्ठा सराहनीय है। अभिषेक सैदापुर पंचायत के वर्तमान मुखिया ममता देवी के पुत्र हैं। अपनी माँ के महज 1 साल के कार्यकाल में उन्होंने अपने पंचायत को खुले में शौच मुक्त बना दिया। अभिषेक बतलाते हैं कि उन्होंने घर-घर जाकर शौचालय का महत्व समझाया तथा लोगों को अपने घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोग इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे लोगों के मन में संशय था कि सरकार द्वारा मिलने वाली शौचालय निर्माण की राशि कमीशनखोरी की शिकार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों को विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने कई लोगों के शौचालय अपने पैसों से बनवाये और लोगों के प्रति उनके साफ नियत को देखते हुए पंचायत की जनता ने धीरे-धीरे उनका साथ देना शुरू कर दिया जिसके परिणाम स्वरुप महज 1 वर्ष की अवधि में उनका पंचायत खुले में शौच मुक्त हो गया। उन्होंने कहा कि अब वह आसपास में दूसरे पंचायतों में भी जाकर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करेंगे।

प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो चुका है। यह योजना पूरी तरह से ब्यूरोक्रेसी के चंगुल में फंस चुका है। लोगों को इस योजना का लाभ दिलाने के लिए उन्हें सीधे सीधे प्रशासन से लोहा लेना पड़ा। हालांकि उन्होंने इस बात की खुशी जताई कि उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को इस योजना का लाभ पहुंचाया। उन्होंने कहा कि जनता का सहयोग और आशीर्वाद ही उनकी असल ताकत और पूंजी है।

अभिषेक ने जो कुछ भी किया वो कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। आज की बड़ी-बड़ी खबरों में इस तरह की सकारात्मक चीज़ें लोगों तक पहुँचने से पहले कहीं दब जाती है। लेकिन खबर यही है जिसके चलते कई गरीब लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिला। अभिषेक ने अपने इस उम्र जिस तरह की ज़िम्मेदारी निभाई और जो लक्ष्य उन्होंने ठान रखा है, सचमुच वो राज्य ही नहीं देश के युवाओं के प्रेरणा हैं।

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