बिहार के 155 साल पुराने इस पुल को कभी कहते थे पटना-आरा की जान

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आरा में सोन नदी पर बना कोईलवर रेल सह सड़क पुल एक ऐतिहासिक धरोहर है। वर्ष 2017 में इसकी उम्र 155 साल हो गई है। पुल का आइडिया तत्कालीन अंग्रेज लोटिस गेस्टर का था। कोइलवर पुल का निर्माण 1856 ई में शुरू हुआ।

इस पुल में 28 पिलर हैं। पुल के ऊपरी हिस्से में रेलमार्ग व निचले हिस्से में टू लेन की सड़क है। जिसमें उत्तरी लेन 3.03 मीटर व दक्षिणी लेन 4.12 मीटर चौड़ा है। पटना राजधानी को कई जिलों को जोड़ने का एकमात्र लाइफ लाइन है।

कोईलवर पुल के ऊपरी मंजिल स्थित अप एवं डाउन रेल लाइन से दर्जन भर सुपर फास्ट ट्रेन समेत दर्जनों यात्री एवं गुड्स ट्रेनें गुजरती हैं। सैकड़ों भारवाहक वाहन समेत बस-कार आदि यात्री वाहन निचले मंजिल के दोहरे सुरंगनुमा सड़क मार्ग से गुजरते हैं। इसके नीचे बहती रहती है सोन नदी की अविरल धारा जिसमें नौकाएं तैरती रहती हैं।

सोन नदी से निकला बालू इसी पुल से उत्तर बिहार तक और पश्चिम में उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र तक वाहनों द्वारा पहुंचकर विकास में योगदान देता है। कोइलवर पुल की लंबाई 1440 मीटर तक दक्षिणी रोड लेन 4.12 मीटर और उत्तरी रोड लेन 3.03 मीटर चौड़ी है।

पुल दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है। ब्रिटिश हुकूमत में 28 पिलरों पर अवस्थित इस पुल के पिलरों की मरम्मत कभी नहीं कराई गई। पुल के पिलरों के 100 और 200 मीटर क्षेत्र में बालू खनन पर हाईकोर्ट रोक के बावजूद अक्सर बालू खनन होता रहा है। जिससे पुल की मजबूती पर असर पड़ता रहा है।

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