15 हजार रुपए प्रति किलो कीमत है इस शहद की, 400 फीट की ऊंचाई पर बांस के सहारे निकालता है

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शहद आज भी लोगों के जीवन के लिए कितना कीमती है, ये खबर पढ़कर आप भी समझ जाएंगे। नेपाल के सद्दी गांव में रहने वाला शख्स हिमालय के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर जाकर शहद निकालता है।

करीब 400 फीट की ऊंचाई पर सिर्फ बांस की सीढ़ी पर लटककर शहद निकाल रहा यह व्यक्ति माउली दन है। माउली 57 साल के हैं और अब भी हिमालय के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर जाकर शहद निकालते हैं।

माउली गुरुंग जनजाति के हैं। नेपाल की यह जनजाति शहद के खतरनाक शिकारियों के रूप में जानी जाती है।

नेशनल जियॉग्राफी ने ‘मौत को मात देने वाले आखिरी शिकारी’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। यह डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर रेनन ओजटर्के ने तैयार की है।

इस दौरान रेनन ने माउली और उनके शिष्य असदन के साथ काफी समय बिताया और उनके साथ जाकर शहद निकालने की फिल्म बनाई।

रेनन बताते हैं कि माउली के शिकार करने का तरीका देखकर उनकी भी सांसे मानो थम सी गई थीं। क्योंकि, माउली ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से सिर्फ बांस की सीढ़ी के सहारे लटककर शहद निकाल लेते हैं।

माउली ने जब एवरेस्ट पर 400 फीट की ऊंचाई पर लटककर शहद निकाला तो वे देखते ही रह गए। नीचे का नजारा डरावना था और गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी।

हालांकि, माउली को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे बचपन से ही इसी तरह मौत को मात देते आ रहे हैं। अब पहाड़ों की ऊंचाई नापना उनके लिए बच्चों का खेल जैसा है।

माउली बताते हैं कि अब उनकी जनजाति में शहद निकालने वाले सिर्फ दो ही लोग बचे हैं। एक वे और दूसरा उनका शिष्य असदन है। असदन 40 साल के हैं।

पहले इनकी पूरी जनजाति शहद निकालने का ही काम करती थी, लेकिन कम आय के चलते धीरे-धीरे लोग दूसरे व्यवसाय से जुड़ गए। माउली ने 15 साल की उम्र में ही अपने पिता से यह हुनर सीख लिया था। पिता के साथ वे हमेशा पहाड़ों पर मौजूद रहते थे।

माउली ने पिता से ही बांस की सीढ़ी बनाना, उसे बांधना और उसके सहारे शहद के छत्ते तक पहुंचना सीखा। माउली बताते हैं कि अब तक उन्हें इतनी बार मधुमक्खियां काट चुकी हैं कि अब उन पर इनके डंक का असर नहीं होता।

इस दौरान वे 20 किलो तक की शहद इकट्ठी कर लेते हैं। बाजार में इस शहद की कीमत प्रति किलो 15 हजार रुपए है। यह दुनिया की सबसे अच्छी शहद में से एक है।

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