दरभंगा जंक्शन पर लाया गया 105 साल पुराना स्टीम इंजन, देखने उमड़ पड़े लोग

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पटना:  जिले के ऐतिहासिक दरभंगा स्टेशन पर 105 साल पुराना दरभंगा महाराज का इंजन स्थापित किया गया है। इस रेल का इंजन 1913 में इंग्लैण्ड में बना था और 1914 में दरभंगा पंहुचा था। इसके सबूत आज भी रेल के इंजन पर लगे हैं।

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह के 105 साल पुराने एक रेल की इंजन को लोहट चीनी मिल से ट्रक पर लाद कर दरभंगा रेलवे स्टेशन लाया गया। काफी मशक्कत के बाद दो क्रेनों की मदद से इंजन को किसी तरह दरभंगा स्टेशन पर धरोहर के रूप में स्थापित किया गया है।

बता दें कि तिरहुत रेल इंजन नंबर 235 के तिरहुत में रेल आने के 12 वर्ष बाद 1886 में दरभंगा के महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह ने तिरहुत में नील की खेती बंद करने का सैद्धांतिक फैसला लिया और इसके विकल्प पर काम शुरु हुआ। नील का विकल्प ईख के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद पंडौल स्थित सबसे बड़े नील कारखाने के निकट चीनी कारखाना लगाने का फैसला हुआ।

जिस वक्त जमशेदपुर और डालमियानगर जैसे औद्योगिक नगर बसाये जा रहे थे। उसी समय यानी 1905 में देश के पहले आधुनिक चीनी मिल का शिलान्यास तत्कालीन दरभंगा जिले के लोहट में हुआ। यह देश की पहली चीनी मिल थी। इस कारखाने में तैयार चीनी तिरहुत इस्टेट रेलवे के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचायी जाती थी। रेल ट्रोली का उपयोग भी इस मिल में सबसे पहले हुआ।

वर्तमान रेल इंजन का उपयोग कारखाना बंद होने तक किया गया था। 21 मई1913 में बना यह इंजन 1914 में इंग्लैंड से दरभंगा पहुंचा।16 मार्च1996 तक इस इंजन ने अपनी सेवा दी।
शुरुआती दिनों में यह इंजन मेन लाइन पर भी चलता था, लेकिन बाद के दिनों में लोहट चीनी मिल से पंडौल स्टेशन तक इसकी आवाजाही सीमित कर दी गई।

1982 में भारतीय रेल ने इस सेक्शन को अपने जिम्मे में लिया और भारतीय रेल की सेवा पंडौल से लोहट सेफर तक पहुंची। इसके बाद इस इंजन का उपयोग परिसर के अंदर माल की आवाजाही भर रह गया। आखिरकार कारखाने के बंद होने के साथ ही मार्च 1996 में यह वाष्प इंजन हमेशा के लिए ठंडा हो गया।

अब इस इंजन को दरभंगा स्टेशन पर ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर रखा गया है। क्रेन चालाक ने कहा कि इसे ट्रक से उतार कर एक निश्चित जगह पर रखना काफी चुनौती भरा था। सफलता पूर्वक रेल इंजन रख खुशी महसूस हो रही है। वहीं, रेलवे डीआरएम रविंद्र जैन ने कहा कि इस ऐतिहासिक स्टीम इंजन को प्राप्त करना गौरव की बात है। सीएम नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद यह संभव हो पाया।

Source: Etv Bihar

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