बिहार में बाढ़ राहत शिविर में बच्चा जन्म लेने पर मिलेंगे 10 से 15,000 रूपये

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Patna: अभी अगस्त महीना चल रहा है. अमूमन जुलाई–अगस्त ही वह महीना होता है जो बिहार के 38 जिलों में से करीब 28 जिलों के कई हिस्सों को जलमग्न कर देता है. आज भी वही हालात बने है और बाढ़ की कहानी हर साल की तरह इस बार भी शुरू है. बाढ़ हालाँकि एक प्राकृतिक आपदा है मगर इस टेक्नोलोजी के ज़माने में आज तक भी बाढ़ से निपटने के कारगर तरीके नहीं मिल पाए हैं.

हालाँकि सरकार अपने तरफ से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चलाती है. सरकारी रहत केन्द्रों को ऊँचे इलाको में बनाया जाता है , इन राहत शिविरों में ठहरने की व्यवस्था तो होती ही है साथ ही सुबह शाम खाने की व्यवस्था , दवाई व् इलाज की व्यवस्था, छोटे बच्चो के लिए दूध , पशुओं के लिए चारा आदि की व्यवस्था होती है. हालाँकि इस दौरान अगर कोई महिला गर्भवती हो तो उन्हें खासकर कई समस्या झेलनी पड़ जाती है.

इनकी समस्याओं को समझते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नयी घोषणा की है. घोषणा के मुताबिक राहत शिविरों में बच्चे का जन्म होने पर उस माँ को अलग से आर्थिक मदद मिलेगी. इसके तहत रहत शिविर में लड़के का जन्म होता है तो दस हजार रूपये दिए जायेंगे, वहीँ बेटी के जन्म होने पर 15 हजार रूपये उसकी माँ को दिए जायेंगे. साथ ही साथ शिविर में गर्भवती महिलाओं को विशेष तौर पर ख्याल रखा जा रहा है.

इसके अलावे बाढ़ से प्रभावित परिवारों को भी सरकार राहत के तौर पर रूपये दे रही है. राज्य सरकार की तरफ से बाढ़ से प्रभावित हर एक परिवार को 6 हजार रूपये दिये जा रहे हैं. लाभुकों को राशि उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किये जा रहे हैं. इसके साथ ही लोगों के लिए जरुरी चीजों के इंतजाम किये गए हैं. इसके सतह ही अगर लोगों की किसी तरह की परेशानी हो तो उसकी भी शिकायत कर सकते हैं . बताते चले कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार हवाई सर्वेक्षण के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो का दौरा कर रहे हैं.

इस दौरान वे खुद भी कई राहत केन्द्रों में बंटने वाले खाना का निरिक्षण कर रहे हैं. इस मुश्किल घडी में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार के खजाने पर पहला हक़ आपदा पीड़ितों का है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि साल 2007 से ही आपदा प्रबंधन के लिए काम शुरू किया गया है. 2016 में भी गंगा का जलस्तर बढ़ा था ,इस बार उसकी तुलना में कम बढ़ा है.

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