स्वाद और सुगंध का धनी भागलपुरी कतरनी चूड़ा

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टेस्ट ऑफ़ बिहार
कतरनी चावल हो कतरनी का चूड़ा. इसके स्वाद और खुशबू को हर बिहारी अच्छी तरह से समझता है. स्वाद और सुगंध के धनी इस कतरनी को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गयी है. भागलपुर के कतरनी धन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन मिल गया है और इसी के साथ अब भागलपुरी कतरनी की खुशबू राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगी. कतरनी के दाने छोटे और सुगंधित होते हैं. पत्तों और डंठल से भी विशेष तरह की खुशबू आती है. यह धन 155-160 दिनों में पक कर तैयार होता है. इसके बाद इसकी खुशबू पूरी दुनिया में बिखरती है. ना केवल कतरनी का निर्यात किया जाता है बल्कि कतरनी को बिहारी स्वाद का संदेशवाहक भी मन जाता है.
सौगात है कतरनी धान


कतरनी धान अंग क्षेत्र का सबसे पसंदीदा धान है. भले ही इसके उत्पादन को लेकर नये नये प्रयोग चल रहे हैं पर आज भी देश-विदेश में रहने वाले लोग जब वापस आते हैं तो भागलपुर से कतरनी चावल और चूड़ा जरूर ले जाते हैं.
दूरदराज में रहने वाले परिजन भी त्योहार व महत्वपूर्ण अवसरों पर अपने संगे-संबंधियों से उपहार के रूप में कतरनी चूड़ा व कतरनी चावल की मांग करते हैं. इससे यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि भागलपुरी कतरनी कि सुगंध व स्वाद के प्रति लोगों में कितना आत्मीय लगाव है.
नेहरू जी को भेट किया गया था चूड़ा


1952 में जब प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू भागलपुर आये थे तो उन्हें तत्कालीन डीएम ने जगदीशपुर प्रखंड के एक किसान के घर ढेकी में तैयार किया गया कतरनी चूड़ा भेट किया गया था. जिससे इस उत्पाद कि अहमियत अतीत के आइने में भी झलकती है.

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