बांका की एक छात्रा उस समय काफी अभिभूत हो गई, जब उसे जिलाधिकारी ने सम्‍मानित किया। उसके आंखों से आंसू छलक गए। वह सम्‍मान पाकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहीं हैं। छात्रा की इस उपलब्धि से उनके स्‍वजन, ग्रामीण और शिक्षक भी खुश हैं।

आइए! हम आपको बताते हैं छात्रा को यह सम्मान कैसे मिला। बेहद गरीब परिवार की छात्रा ललिता कुमारी कस्‍तूरबा विद्यालय शंभूगंज की छात्रा है। बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड के कसबा गांव की रहने वाली यह छात्रा पढ़ने के प्रति काफी गंभीर है। वह बेहतर शिक्षा प्राप्त कर देश सेवा करना चाहती है। लेकिन उसके पिता गैनू दास और मां झामो देवी को अपनी बेटी को पढ़ाने का सामर्थ्य नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार चाहते थे कि ललिता की शादी शीघ्र हो जाए। स्वजनों ने ललिता की शादी तय कर दी।

ललिता ने किया बाल विवाह का विरोध
यह वाकया वर्ष 2019 का है। उस समय ललिता मध्य विद्यालय कसबा में सातवीं कक्षा की छात्रा थी। ललिता ने अपनी शादी का विरोध किया। ललिता ने अपने स्‍वजनों को कहा कि मैं अभी शादी के योग्‍य नहीं हूं, नाबालिग हूं और आगे पढ़ना चाहती हूं। ललिता ने अपनी शादी का मुखर रूप से विरोध किया। लेकिन उसके माता-पिता ने एक ना सूनी। इतना ही नहीं स्‍वजनों ने ललिता की शादी की तिथि मुकर्रर कर दी।

ललिता अंदर ही अंदर घुटन महसूस करने लगी। वह कुछ करना चाहती थी। उसे पढ़ाई-लिखाई के अरमानों पर पानी फिरता देखने लगा। वह विचलित हो गई। परेशान होकर ललिता ने यह जानकारी विद्यालय के मीना मंच और बाल संसद की सहेलियों को दी। सहेलियों के साथ मिलकर ललिता ने कुछ तरकीब निकाली।

विद्यालय प्रधान से मिली छात्राएं
ललिता और उनकी सहेलियां विद्यालय प्रधान से मिलीं। विद्यालय प्रधान अशोक कुमार सिंह को ललिता ने सारी जानकारी दी। ललिता ने कहा कि वह अभी शादी करना नहीं चाहती है। वह पढ़ना चाहती है। विद्यालय प्रधान ने ललिता को आश्‍वासन दिया कि वह इस विवाह को नहीं होने देगा।

विद्यालय प्रधान से ललिता के माता-पिता से की बात
विद्यालय प्रधान ने ललिता के माता-पिता को बुलाया और उन्हें काफी समाझाया। उन्‍होंने उसके माता-पिता को ललिता की योग्यता को बताया। उन्‍होंने कहा ललिता मेधावी छात्रा है। इसे पढ़ने दिया है। इसकी उम्र भी अभी शादी के योग्‍य नहीं है। विद्यालय प्रधान ने बाल विवाह से होने वाले नुकसान की भी जानकारी ललिता के माता-पिता को दी। उन्‍होंने कहा कि बाल विवाह से स्‍वास्‍थ्‍य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विद्यालय प्रधान की बात सुनकर ललिता के माता-पिता राजी हुए। उन्‍होंने ललिता की अभी शादी नहीं कराने का आश्वासन दिया।

जिलाधिकारी ने कहा-शाबाश ललिता
जब यह जानकारी जिलाधिकारी कुंदन कुमार को मिली तो उन्‍होंने ललिता को शाबाशी दी। उन्‍होंने कहा कि ललिता जैसी हिम्मती और साहसी लड़की की आज देश को जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि ललिता ने बाल विवाह जैसी कुरीतियों का जिस तरह विरोध किया, वह प्रशंसनीय है। जिलाधिकारी ने ललिता को आश्‍वासन दिया कि आगे की पढ़ाई में अगर कोई बाधा हो तो वे बेझिझक हमसे मिलें। इस प्रशंसनीय कार्य के लिए बांका जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने ललिता को प्रशस्ति पत्र देकर सम्‍मानित किया।

छात्राओं के लिए बनीं प्रेरणाश्रोत
ललिता आज छात्राओं की प्रेरणाश्रोत बन गईं हैं। छात्राएं ललिता की प्रशंसा करतीं हैं। ललिता को सम्‍मान मिलने पर शिक्षक, ग्रामीण, स्‍वजन और छात्राओं ने उन्हें बधाई दी। कस्तूरबा विद्यालय शंभूगंज और मध्य विद्यालय कसबा में आज ललिता की ही चर्चा हो रही है। सभी ने एक स्वर से कहा-ललिता की पढ़ाई में अर्थ को बाधा बनने नहीं दिया जाएगा। ललिता की पढ़ाई के प्रति सोच और कुछ कर गुजरने की चाहत से बाल विवाह जैसी कुप्रथा का अंत होगा।

Source – Jagran

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