बिहार की इस पाठशाला में वैदिक शिक्षा लेने न्यूजर्सी, कैलीफोर्निया, ऑस्टिया और जर्मनी से आते हैं छात्र

इतिहास

भगवान विष्णु की नगरी गयाजी में एक ऐसी पाठशाला है जहां पर विद्यार्थियों को निश्शुल्क कर्मकांड, वेद, साहित्य व ज्योतिष की शिक्षा दी जा रही है।

 समाज को संस्कारित शिक्षा ग्रहण कराने वाले पं. रामाचार्य का यह गुरुकुल भेदभाव से दूर है। यहां हर वर्ग व जाति के बच्चे वेद, पुराण, कर्मकांड की शिक्षा ग्रहण करते हैं।
आर्थिक व सामाजिक दृष्टिकोण से कमजोर परिवार के बच्चों को संस्कारों की शिक्षा शहर के दो स्थानों पर प्रतिदिन दी जाती है। पहला विष्णुपद मंदिर के मुख्य द्वार के पास और दूसरा शहर के दक्षिणी क्षेत्र के माड़नपुर बाईपास पुल के निकट। रामाचार्य वैदिक पाठशाला नाम से गुरुकुल की स्थापना पं. रामाचार्य ने की है।
दोनों स्थानों पर चल रही वैदिक पाठशाला में 70 शिष्य कर्मकांड, ज्योतिष, वेद, साहित्य व मंदिरों में पूजा पाठ के साथ संस्कार की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पाठशाला में सिर्फ सूबे के ही नहीं, विदेशों से भी युवा यहां रहकर कर्मकांड व ज्योतिष की शिक्षा प्राप्त करते हैं। पाठशाला 43 साल से निश्शुल्क चल रही है।
इस गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने वाले पांच साल तक लगातार शिक्षा ग्रहण करने के बाद श्रीगुरु सर्व: भउ संस्कृत विद्यापीठ मंत्रलय, कर्नाटक से डिग्री प्राप्त करने के लिए परीक्षा में शामिल होते हैं।




इस पाठशाला में विद्यार्थियों को आरंभ में स्त्रोत, अक्षर ज्ञान की शिक्षा दी जाती है। यहां छह से सात साल की आयु से विद्यार्थियों का प्रवेश शुरू हो जाता है। नामांकन निश्शुल्क है। यहां तीन घंटे की विशेष कक्षा चलती है।
यह अवधि प्रतिदिन संध्या 5:30 से रात्रि 8:30 बजे की होती है। 43 वर्ष से संचालित इस गुरुकुल यानी ‘मंत्रलय रामाचार्य वैदिक पाठशाला’ से 900 से अधिक छात्र वैदिक शिक्षा का ज्ञान अर्जित कर चुके हैं। यहां से शिक्षा हासिल कर चुके विद्यार्थी विदेशों में मंदिरों के पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं।





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कई विद्यार्थी न्यूजर्सी, कैलीफोर्निया, ऑस्टिया व जर्मनी आदि देशों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस पाठशाला में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा के साथ साथ उन्हें आवासीय परिसर, धार्मिक पुस्तक, कलम, अभ्यास पुस्तिका के साथ ही पहनने के लिए वस्त्र व भोजन उपलब्ध कराए जाते हैं।
मंत्रालय रामाचार्य वैदिक पाठशाला के संरक्षक पं. रामाचार्या के पुत्र राजा आचार्य कहते हैं कि विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने के साथ उनकी सेवा में असीम आनंद की अनुभूति होती है।




ब्राह्मण और गयापाल पंडा समाज के बहुत बच्चे कर्मकांड और वैदिक शिक्षा हासिल करने में पीछे रह जाते है। चाहता हूं कि समाज का कोई बच्चा अशिक्षित नहीं रह जाए। इस पाठशाला में हर जाति के बच्चों को शिक्षा दी जाती है।








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