रात को पति से कॉलेज के सामने पराठे बेचती है , दिन में PhD की पढाई करती है उसी कॉलेज में

कही-सुनी

सपनों को देखना बड़ा आसान होता है, लेकिन उसे पूरा करना सहज नहीं होता। कुछ ऐसे ही हालातों की कहानी है केरल में रहने वाली स्नेहा लिंबोंमकर की है।

सपनों को देखना बड़ा आसान होता है, लेकिन उसे पूरा करना सहज नहीं होता। कुछ ऐसे ही हालातों की कहानी है केरल में रहने वाली स्नेहा लिंबोंमकर की है।

स्नेहा सोशल साइट के जरिए एक लड़के से मिलती है, और उससे शादी कर लेती है। शादी के वक्त स्नेहा डॉक्ट्रल रिसर्च की पढ़ाई कर रही थी, लेकिन वक्त ने उनका साथ नहीं दिया और घर की माली हालत बिगड़ने लगी। उन्हें घर का खर्च चलाने में भी समस्या होने लगी।

इसलिए दोनों ने फैसला किया कि रात को दोनों पराठें बेचेंगे और सुबह स्नेहा अपनी PhD की पढ़ाई पूरी करेंगी। स्नेहा जिस कॉलेज में पढ़ रही हैं, उसी के बाहर उनके पति परांठे का ठेला लगाते हैं।

कॉलेज से निकल कर, वो सीधा अपने पति की मदद करने चली जाती हैं।

5 साल की शादी में दोनों ने एक दूसरे के लिए काफी कुछ त्याग दिया है।

पति प्रेमशंकर ने अपनी CAG की नौकरी छोड़ी और पत्नी की पढ़ाई में मदद करने के लिए परांठों का ठेला लगा लिया।

वहीं पत्नी सुबह अपनी पढ़ाई और शाम को पती की मदद करने में देरी नहीं करतीं।

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