मोदी मंत्रिमंडल

बाहर हो सकते हैं रूडी, उपेंद्र कुशवाहा और वीरेंद्र, मोदी मंत्रिमंडल में JDU की होगी एंट्री

राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल विस्तार व फेरबदल का वक़्त ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है, त्यों त्यों तस्वीर साफ़ हो रही है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी, उपेंद्र कुशवाहा और चौधरी वीरेंद्र सिंह की मुलाक़ात के बाद कयास का बाज़ार गर्म हो गया है.

सूत्रों के अनुसार इनके मोदी मंत्रिमंडल से बाहर किये जाने की पूरी संभावना है. रूडी के मंत्रालय का कार्य संतोषजनक नहीं रहा है. कुशवाहा के मंत्रालय के कामकाज से भी अधिक नीतीश कुमार का राजग में शामिल होना ही बड़ी वजह है.

वीरेंद्र सिंह के मंत्रालय का रिपोर्ट कार्ड भी ठीक नहीं बताया जा रहा है. इसके अलावा इनके बाहर किये जाने की वजह भूपेंद्र सिंह हुड्डा बताये जा रहे हैं. गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिनों में सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री मोदी व हुड्डा की मुलाकात व एकांत में कुछ बात हुई थी.




मोदी मंत्रिमंडल




उसके बाद ही हुड्डा के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा शुरू हो गई थी. वैसे भी हुड्डा व वीरेंद्र सिंह के रिश्ते शुरू से बेहद तल्ख रहे हैं. इनके बीजेपी में शामिल होने की एक बड़ी वजह हुड्डा भी थे.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का तमिलनाडु दौरा रद्द हो गया है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी विदेश दौरे से 26 अगस्त को लौटेंगे. इसके बाद ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल हो सकता है.









दर्जनभर मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी

मोदी मंत्रिमडल से दर्जनभर मंत्रियों की छुट्टी किये जाने की संभावना है. सूत्र बता रहे हैं कि जिन मंत्रियों का काम-काज ठीक नहीं रहा है उनकी छुट्टी हो सकती है और ऐसे मंत्रियों की संख्या 12 के आसपास मानी जा रही है.

खबर ये है कि सरकार ने सभी मंत्रालयों की एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार करवाई है. इस रिपोर्ट में अलग-अलग मंत्रालयों और मंत्रियों के काम-काज का ब्यौरा है. हालांकि निकाले जाने वाले मंत्रियों में कलराज मिश्रा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था.




अब राजीव प्रताप रूडी, उपेंद्र कुशवाहा और वीरेंद्र सिंह के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है. वेंकैया नायडू के उप राष्ट्रपति बनने, मनोहर पर्रिकर के गोवा का मुख्यमंत्री बनने और अनिल दवे के निधन के बाद नगर विकास, सूचना प्रसारण, पर्यावरण और रक्षा जैसे 4 अहम मंत्रालय अतिरिक्त प्रभार पर चल रहे हैं.

इसके अलावा ठीक काम ना करने वाले कुछ मंत्रालयों में फेरबदल को मिला दें, तो ठीक-ठाक संख्या में बदलाव होना है. बीजेपी संगठन से राम माधव और भूपेंद्र यादव को भी मंत्री बनाये जाने की चर्चा है बीजेपी के अलावा एआईएडीएमके, जदयू और शिव सेना के भी शामिल होने की संभावना है.









एआईएडीएमके के 2 केबिनेट और 2 राज्यमंत्री बन सकते हैं. इनमें थंबी दुरई, मैत्रेयी, वेणुगोपाल के मंत्री बनने की संभावना अधिक है, जनता दल (यू) के भी मोदी मंत्रिमंडल में 2 मंत्री बनेंगे. कयास लगाया जा रहा है कि आरसीपी सिंह और वशिष्ठ नारायण सिंह में से कोई एक कैबिनेट मंत्री बनेंगे.

किसी एक अन्य सांसद को राज्य मंत्री भी बनाया जायेगा. वैसे केसी त्यागी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है लेकिन संसद के किसी भी सदन के वह सदस्य नहीं हैं. जनता दल (यू) के लोकसभा में दो और राज्यसभा में दस सदस्य हैं.




शिवसेना से आनंदराव अडसुल भी राज्यमंत्री बन सकते हैं. अभी तक शिवसेना से एकमात्र अनंत गीते ही कैबिनेट मंत्री हैं.
आधा दर्जन नए राज्यपालों की होगी एंट्री

सात राज्यों के राज्यपालों की सूची भी तैयार हो गई है. इनमें कलराज मिश्रा, लालजी टंडन, विजय कुमार मल्होत्रा, कैलाश जोशी, सीपी ठाकुर और आनंदी बेन पटेल का नाम शामिल है. जीतन राम मांझी को भी राज्यपाल बनाये जाने की चर्चा के बीच एक और नाम इसमें जुड़ गया है वीरेंद्र सिंह का.

दरअसल, देश के आधा दर्जन राज्यों के राजभवन में विभिन्न कारणों से राज्यपाल की कुर्सी खाली है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा बिहार के राज्यपाल के पद से इस्तीफा देने के बाद से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी बिहार का भी अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं.




इसी तरह गुजरात के राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली मध्यप्रदेश का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं. महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव तमिलनाडु का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं. आंध्रप्रदेश के राज्यपाल इएसएल नरसिम्हन तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं.

असम के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित मेघालय के राज्यपाल का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं. नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभा आचार्य अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं.




यानी आधा दर्जन राज्य बिहार, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल की कुर्सी खाली है. इसके अलावा दमन दीव के लेफ्टिनेंट गवर्नर प्रफुल्ल खोदा पटेल दादर व नगर हवेली के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं.







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