मुसल्लहपुर बाजार समिति बनेगी बिहार की मॉडल मंडी

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बिहार की मंडियों में सबसे बड़ी है मुसल्लहपुर बाजार समिति मंडी। करीब 76 एकड़ में फैली इस मंडी की स्थापना 1980 में हुई। करीब 200 स्थायी और 500 चलंत दुकानें हैं। यहां सभी तरह के फल, मछली, आलू, प्याज, बकरी की खरीद-फरोख्त होती है।

हर दिन करोड़ों रुपए का कारोबार होता है। इस मंडी में देश के सभी राज्यों से व्यापारी पहुंचते हैं। सरकार को भी यहां से हर दिन लाखों रुपए का राजस्व मिलता है। बावजूद इन सबके मंडी फल की जगह समस्याओं का मरकज बनी है।

मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक सह कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय ने मंडी का निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार की उम्मीद तेज कर दी है। उन्होंने संकेत दिया कि मंडी की बड़ी समस्याओं में गंदगी, जल जमाव व अतिक्रमण को दूर करने की दिशा में जल्द ही ठोस प्रयास किया जाएगा। व्यापारियों ने बाजार समिति मंडी को बिहार की मॉडल मंडी बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिया है।





मुसल्लहपुर




तीन पृष्ठों का पत्र विभागीय मंत्री व निदेशक को भेजा गया है। वरूण कुमार, मुमताज अहमद, मो. हसनैन, कुमार मंगलम, मुन्ना खान, साबिर भुट्टो, इसरार आलम उर्फ मास्टर साहब समेत अन्य व्यापारियों ने कहा कि मॉडल मंडी के रूप में मुसल्लहपुर बाजार समिति को विकसित करने में विभाग ने रुचि दिखाई है।

व्यापारियों ने कहा कि मंडी में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस फल व सब्जी के दो अलग कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता है। परिसर की नियमित व समुचित सफाई के लिए दो पाली में सफाई कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए।









मंडी के अंदर की सड़क 60 फीट चौड़ी, जल निकासी की व्यवस्था, वाहनों के प्रवेश व निकास के लिए दो प्रवेश द्वार, आने वाले व्यापारियों व कर्मियों के लिए पेयजल व चार डीलक्स शौचालय व्यवस्था जरूरी है।

माल लेकर आने वाले वाहनों तथा खाली वाहनों के लिए अलग पार्किंग, व्यापारियों के ठहराव व खानपान के लिए गेस्टहाउस व कैंटीन सुविधा होनी चाहिए। परिसर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, चेक पोस्ट का निर्माण। वाहनों के वजन के लिए प्रवेश द्वार पर ही कांटा की व्यवस्था हो।




मुसल्लहपुर

व्यापारियों ने विभाग से कहा कि मॉडल मंडी के रूप में विकसित करने के लिए परिसर में हरियाली, रौशनी, बैंक व पोस्ट ऑफिस जरूरी है। व्यापारियों के साथ हर महीने सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा समीक्षा बैठक करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।’







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