मिसाल हैं ये बैंक मैनेजर, गरीब बच्चों को पढ़ाने में जुटी हैं जी जान से

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तरुणा के लिए आज ये बच्चे ही सबकुछ हैं। उन्हें इन गरीब बच्चों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। वह अपने कुछ दोस्तों के साथ इन्हें पढ़ाती हैं।

इनमें से कई सारे बच्चे तो अपने पैरेंट्स के काम में हाथ भी बंटाते हैं और घर का काम भी देखते हैं इस वजह से उन्हें पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है।

उनका संगठन निर्भेद फाउंडेशन इस बात को लेकर काफी प्रतिबद्ध है कि कोई भी बच्चा भूखा नहीं रहेगा कोई भी पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा। निर्भेद फाउंडेशन की दूसरी वर्ष गांठ पर ये निर्णय लिया गया।

30 साल की तरुणा विधाय ने गरीब बच्चों को शिक्षा और भोजन उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। पेशे से बैंक मैनेजर तरुण जो कुछ भी इन बच्चों के लिए कर सकती हैं, वह सब करती हैं। वह बताती हैं, ‘अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में मैंने देखा है कि कैसे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे पैसे के आभाव में अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।’

वह पब्लिक सेक्टर के एक बड़े बैंक में काम करती हैं और वहां से फुरसत निकालकर गाजियाबाद के इंदिरापुरम में गरीब बच्चों को पढ़ाने और उनकी मदद करने का काम करती हैं। इसकी शुरुआत 2012 में हुई थी जब तरुणा अपने काम से फुर्सत पाकर स्लम इलाके में रहने वाले बच्चों को पढ़ाती थीं।

उन्होंने कहा, ‘मैं अपना काम शाम को पांच बजे खत्म कर सीधे इन बच्चों के पास पहुंचती थीं। मैं उनके साथ हर रोज लगभग तीन से चार घंटे बिताती हूं। हम साथ में सीखते हैं , खाते हैं और गाने भी गाते हैं।’ काफी थोड़े समय के लिए शुरू किया गया तरुणा का यह काम कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया पता ही नहीं चला।

अपने परिवार के बारे में बात करते हुए वह कहती हैं कि उनके ऊपर जल्दी से नौकरी कर के शादी करने का दबाव था, लेकिन मैंने यह प्रण ले लिया था कि मैं उसी से शादी करूंगी जो मेरे इस काम को अच्छे से सपॉर्ट कर सके। क्योंकि मेरा अच्छा-खासा समय इन बच्चों के बीच बीतता है।

शुरू में उनके परिवार वालों ने तो थोड़ा ऐतराज जताया लेकिन आखिरकार तरुणा की लगन और समर्पण के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा। अब तरुणा के काम को उनके परिवार वाले काफी सपोर्ट करते हैं। उन्हें को गर्व होता है कि तरुणा आज गरीब बच्चों के लिए काम कर रही हैं।

तरुणा के लिए आज ये बच्चे ही सबकुछ हैं। उन्हें इन गरीब बच्चों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। वह अपने कुछ दोस्तों के साथ इन्हें पढ़ाती हैं। वह बताती हैं कि ये बच्चे काफी प्रतिभावान हैं और पढ़ने में भी काफी अच्छे हैं, लेकिन परिवार की स्थिति अच्छी न होने के कारण ये स्कूल का मुंह नहीं देख पाते।

इनमें से कई सारे बच्चे तो अपने पैरेंट्स के काम में हाथ भी बंटाते हैं और घर का काम भी देखते हैं इस वजह से उन्हें पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है।

तरुणा के स्कूल के बच्चे

इस काम के लिए उन्हें पैसों की भी जरूरत पड़ी और इसके लिए उन्होंने अपने ग्रुप के हर सदस्य से 2000 रुपये दान के रूप में लिए। इसमें बुक्स, स्टेशनरी जैसी चीजें खरीदी गईं।

इस समस्या को हल करने के लिए तरुणा ने एक कैंपेन शुरू किया है। वे 100 बच्चों को चुनकर उन्हें खाने पीने की सुविधा प्रदान कर रही हैं ताकि इन्हें पढ़ने के लिए काम न करना पड़े। इनके माता-पिताओं को ये बच्चे बोझ लगते हैं।

इस काम के लिए उन्हें पैसों की भी जरूरत पड़ी और इसके लिए उन्होंने अपने ग्रुप के हर सदस्य से 2000 रुपये दान के रूप में लिए। इसमें बुक्स, स्टेशनरी जैसी चीजें खरीदी गईं। वे बच्चों को खाना भी उपलब्ध करवाती हैं जिसमें दाल, रोटी, और पराठे जैसा पौष्टिक आहार शामिल होता है।

इस पहल के बाद उनके स्कूल में बच्चों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ने लगी। वे बच्चों के लिए कई सारे एक्सरसाई भी करवाती हैं। यह उन बच्चों की दिनचर्या में शामिल होता है।

उनका संगठन निर्भेद फाउंडेशन इस बात को लेकर काफी प्रतिबद्ध है कि कोई भी बच्चा भूखा नहीं रहेगा कोई भी पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा। निर्भेद फाउंडेशन की दूसरी वर्ष गांठ पर ये निर्णय लिया गया है कि प्रोजेक्ट निर्माण के तहत मुफ्त शिक्षा के साथ साथ स्कूल, अनाथालय और मुफ्त चिकत्सा सेण्टर खोला जायेगा।

जरुरतमंदो को मुफ्त शिक्षा एवं शिक्षा सामग्री के साथ-साथ मुफ्त में भोजन कपड़े भी दिए जायेंगे। जिन बच्चो के पास रहने की सुविधा नहीं होगी उन को रहने के साथ साथ शिक्षा खाने पीने की व्यवस्था भी की जाएगी।

जो छात्र/छात्रा प्रोजेक्ट निर्माण के तहत रजिस्टर्ड होंगे उन के परिवार की भी जिम्मेदारी निर्भेद फाउंडेशन ही उठाएगा। अगर आप भी तरुणा के इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उन्हें इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं- +91-9599044255.

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