सरकार ने बताया है कि अगर भारत में बड़े स्तर पर कोरोना वायरस का प्रसार होता है तो वह इससे कैसे निपटेगी. इसमें अधिक मामलों वाले क्लस्टर (नियंत्रण क्षेत्र) और बड़े स्तर पर प्रवासियों के इलाके/ या विदेशों से निकाले गए लोगों के केंद्र जैसी जगहों के लिए रणनीति बताई गई है. बड़े स्तर पर कोरोना वायरस के प्रसार से निपटने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च की ओर से एक एडवायजरी जारी की गई है. इस एडवायजरी में कोविड-19 के लिए 4 अप्रैल, 2020 से तेजी से एंटीबॉडी आधारित खून की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.

जारी की गई एडवायजरी में कहा गया है कि यहां पर इंफ्लुएंजा जैसी बीमारियो के मामलों की जांच स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाएगी. किसी भी तरह की बढ़त पर नजर रखी जाएगी और अतिरिक्त जांच के लिए इसे सर्विलांस ऑफिसर या सीएमओ की जानकारी में लाया जाएगा.

इंफ्लुएंजा के लक्षण वाले सभी रोगियों का किया जाएगा एंटीबॉडी टेस्ट
जारी की गई एडवायजरी के मुताबिक स्वास्थ्य केंद्र पर इंफ्लुएंजा के लक्षण वाले सभी लोगों का लगातार एंटीबॉडी टेस्ट के लिए परीक्षण किया जाएगा. ऐसे में-

अगर उनका टेस्ट निगेटिव आता है- जरूरत महसूस होती है तो तुरंत ही RT-PCR के जरिए गले और नाक से स्वाब लेकर इसे कंफर्म किया जाएगा.

RT-PCR भी निगेटिव आता है- तो इसका मतलब होगा कि उन्हें कोविड-19 से अलग इंफ्लुएंजा हो सकता है.

अगर RT-PCR पॉजिटिव आता है- तो उन्हें COVID-19 का कंफर्म मामला माना जाएगा और प्रोटोकॉल के हिसाब से कदम उठाए जाएंगे ताकि उन्हें अलग किया जा सके, इलाज दिया जा सके और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा सके.

निगेटिव पाए गए लोगों का 10 दिनों बाद फिर से किया जाएगा एंटीबॉडी टेस्ट

अगर इंफ्लुएंजा के मरीजों का RT-PCR नहीं किया जाता है तो उन्हें होम क्वारंटीन में रखा जाएगा और फिर से 10 दिनों के बाद एंटीबॉडी टेस्टिंग की जाएगी, जिसमें-

एंटीबॉडी टेस्ट निगेटिव आता है- तो COVID-19 से अलग इंफ्लुएंजा माना जाएगा.

एंटीबॉडी टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है- ऐसे में हाल ही में इंफेक्शन की संभावना होगी.

ऐसे एंटीबॉडी टेस्ट के पॉजिटिव आने पर- क्लीनिकल असेसमेंट के बाद, अस्पताल में इलाज के लिए या आइसोलेशन में प्रोटोकॉल के तहत ले जाया जाएगा. प्रोटोकॉल के मुताबिक ही एक्शन लिए जाएंगे और इसके मुताबिक ही संपर्क में आए लोगों की पहचान की जाएगी.

अगर लक्षण बुरी हालत में पहुंच जाते हैं तो नजदीकी COVID-19 हॉस्पिटल में भेज दिया जाएगा.
अगर घर पर क्वारंटीन संभव नहीं होता तो स्वास्थ्य केंद्र में ऐसा किए जाने पर विचार किया जाएगा.

इंफ्लुएंजा जैसी बीमारियों के लक्षण वाले सभी लोगों को 14 दिन घर में किया जाएगा क्वारंटीन
ऐसे लोगों की पहचान करने के बाद, ILI के लक्षण वाले सभी लोगों को एहतियातन अपने घरों में 14 दिनों के लिए क्वारंटीन किया जाएगा.

SOURCE – NEWS 18

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