आप पटना को कितना पहचानते हैं? इस शहर में मौजूद बड़ी इमारतों, कॉलेजों और कलाकृतियों को अभी तक आपने सिर्फ देखा होगा, लेकिन पहचाना नहीं होगा. इन सबकी पहचान आपको अरुण कुमार की किताब ‘पटना खोया हुआ शहर’ कराएगी. हम सभी किसी भी चीज़ या शहर के बारे में जानकारी पाने के लिए गूगल करते हैं या फिर गाइड का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर आपको ये सबकुछ एक किताब में ही मिल जाए, तो इससे बेहतर और क्या चीज़ है.

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अभी तक आपने मोटी-मोटी किताबों में बंद पटना के किस्सों को पढ़ने में अपना वक्त जाया किया हो, लेकिन लेखक अरुण कुमार की किताब ‘पटना खोया हुआ शहर’, आपको आपकी ही भाषा में पटना के कहे-अनसुने किस्सों से रूबरू करा देगी.

पटना, बिहार की राजधानी को अभी तक आपने धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन का चश्मा लगाकर देखा होगा. यहां की तंग गलियों और भीड़-भाड़ को देख आपने दूर से ही पटना की छवि उन शहरों की तरह बना ली होगी, जो शहरीकरण और विकास के बीच का सफर तय कर रही है. लेकिन किताब पटना खोया हुआ शहर आपको अलग ही पटना के दर्शन कराएगी.

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जी हां, पटना के धुंधले इतिहास से काफी बुद्धीजिवी वाकिफ होंगे कि पटना कभी पाटलिपुत्र हुआ करता था. इस बात का ज्ञान कई लोगों ने सिर्फ पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन से लगाया होगा. लेकिन पटना का इतिहास संपूर्ण भारत जैसा ही है. अभी तक आपने भारत के संबंध में मुगल, मौर्य, डच, अग्रेज़ों, महान राजनीतिज्ञों, स्वंतत्रता सेनानियों और लेखकों के बारे में पढ़ा होगा. अरुण कुमार की इस किताब में पटना के संबंध में ये सभी किरदार अपनी पूरी भूमिका में मिलेंगे, मानो भारत का सबसे अहम क्षेत्र सिर्फ पटना ही हो.

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आप अगर पटना से हों या फिर पटना आना-जाना रहा हो तो यहां मौजूद हर एक जगह जैसे डाकबंगला चौराहे के पास मौजूद कॉफी हाउस, इंग्लिश मार्केट, शहीद स्मारक, पटना नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सुल्तान पैलेस, सिंकदर मंजिल, मरियम मंजिल और कंष्ण कुंज आदि के बारे में आपको रोचक बातें इसी किताब से मिलेंगी.

इसके अलावा पटना का सबसे खूंखार 1857 का कमिश्नर विलियम टेलर का नरसंहार. अफीम, पटना कलम (चित्रकारी), शोरा, सिल्क और सूती कपड़ा के लिए विश्वभर (यूरोप, एशिया और अफ्रीका) में प्रसिद्ध पटना का बाज़ार. अंग्रेज़ों द्वारा बाज़ार को खत्म कर विदेशी सामानों को कम दामों में बेचना. आज की प्रसिद्ध बिल्डिंग्स और इमारतों में दफ्न इतिहास. मगध, नन्द, मौर्य, शुंग, गुप्त और पाल साम्राज्यों की राजधानी पाटलिपुत्र, बुद्ध, गांधी, अकबर, मगध सम्राट अजातशत्रु, अजीमाबाद (पटना का पुराना नाम), स्कॉटलैंड का पटना आदि के बारे में भरपूर जानकारी मिलेगी.

अगर आपको इतिहास पढ़ना बोझिल लगे, तो लेखक ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है. आम बोल-चाल की भाषा में एक या दो पेज़ के अध्याय में पटना के बारे में मज़ेदार तरीके से समझाया गया है. इस शहर को और आसानी से समझाने के लिए ब्लैक एंड व्हाइट चित्र भी इस किताब में मिलेंगे.

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कम शब्दों में कहें तो पटना के बारे में इससे अच्छी जानकारी आपको और कहीं नही मिलेगी, खासकर हिंदी भाषा में.

किताब का नाम – पटना खोया पाया शहर
लेखक – अरुण सिंह
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कीमत – हार्डकवर (595 रुपये) और पेपर कवर (299 रुपये)
प्रकाशक – वाणी प्रकाशन

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