पढ़ाई

अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए सुबह 4 बजे उठकर दूध बेचती है बेटी, पिता पर बोझ नहीं, उनका सहारा है

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मां-बाप के पास बच्चों को स्कूल भेजने के पैसे ना हो, कॉपी किताब खरीदने के पैसे ना हो, तो अक्सर बच्चे पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताएंगे जिसने पैसों की तंगी की वजह से पढ़ाई तो छोड़ दिया लेकिन हौसले नहीं छोड़े।

हौंसलों के दम पर पिता का साथ देकर ना सिर्फ उनकी मदद की, बल्कि अपनी पढ़ाई के लिए भी पैसे जुटाए। 19 साल नीतू ने वो काम कर दिखाया जिसे शायद ही कोई आज के दौर में करने की सोचे। नीतू का ये जज्बा वाकई काबिले तारीफ है।

हम बात कर रहे हैं राजस्थान की रहने वाली 19 साल की नीतू शर्मा की। नीतू के पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए उसने 8वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी। लेकिन जब मन में पढ़ने का जज्बा हो तो सारी कायनात भी आपको आपकी मंजिल से मिलाने से पीछे नहीं हटती है। नीतू ने बचपन से ही टीचर बनने के ख्वाब सजा लिए थे।




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नीतू खुद पढ़ाई करके बच्चों को पढ़ाना चाहती थी। लेकिन पैसों ने नीतू का साथ छोड़ दिया, उसे अपनी पढ़ाई बीच मझदार में छोड़नी पड़ी। हां लेकिन नीतू ने अपना हौसला नहीं छोड़ा। नीतू ने पढ़ाई के लिए वो कदम उठाया जो शायद ही कोई कर पाए।

पिता बनवारी लाल शर्मा ने पैसों की तंगी का हवाला देते हुए नीतू की पढ़ाई रोक दी। इसलिए उसने अपने पिता का बोझ कम करने के लिए दूध बेचना शुरु कर दिया। नीतू की एक बड़ी बहन भी है जिसका नाम सुषमा है। दूध बेचने के काम में सुषमा ने भी नीतू का साथ दिया जो कि पैसे की कमी के कारण पहले ही स्कूल जाना छोड़ चुकी है।




नीतू रोज सुबह 4 बजे उठती है और फिर भंडोर खुर्द गांव में घरों से दूध इकट्ठा कर उसे भरतपुर सिटी में घर-घर बेचने के लिए जाती है। गांव से भरतपुर सिटी तक नीतू अपनी बहन सुषमा के साथ मोटरसाइकल पर जाती है।

सुषमा बाइक के पीछे बैठकर दूध के डिब्बों को संभालती है। दूध बेचने के बाद नीतू राजस्थान स्टेट सर्टिफिकेट कोर्स से इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी की दो घंटे की क्लास के लिए चली जाती है। नीतू की क्लास 10 बजे से 12 तक चलती है।




वहीं सुषमा अपने रिश्तेदारों के यहां रुककर नीतू के क्लास से वापस आने का इंतजार करती और फिर नीतू के वापस आने के बाद दोनों घर लौट जाती हैं। यह काम तब से कर रही हैं जब उसने आठवीं कक्षा पास की थी।

दोनों बहने दूध बेचकर करीब 1 बजे घर पहुंचती हैं। थोड़ी देर आराम करके दोनों फिर शाम को 5 बजे दूध बेचने के लिए निकल जाती हैं। पहले नीतू अपने कंधों पर दूध का डिब्बा रखकर 5 किलोमीटर का सफर तय कर दूध बेचने के लिए जाती थी। रोज नीतू दोनों समय 90 लीटर दूध बेचती है जिससे उसे सभी खर्चों के बाद 12 हजार रुपए महीने जाते हैं।



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सुषमा ने गांव में ही एक बरतन की दुकान खोल ली है और वहीं नीतू अब बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही है। नीतू का कहना है कि धरती पर ऐसा कोई काम नहीं है जिसे लड़कियां नहीं कर सकती हैं।








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