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बिहार को नार्वे की कंपनी देगी 3000 करोड़, सोलर एनर्जी से जगमगाएंगे गांव

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नार्वे की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 3000 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) की 7वीं बैठक में दिया। इस प्रस्ताव पर विचार करने से पहले कंपनी के बारे में सारी सूचना इकट्ठा करने के लिए निवेश आयुक्त को आदेश दिया गया है।

निवेश आयुक्त जल्द ही नार्वे के दूतावास से मिलकर कंपनी के बारे में पूरी जानकारी इकट्‌ठा करेंगे, फिर इस पर अगस्त में होने वाली बैठक में विचार किया जाएगा।

बिहार सरकार ने सौर ऊर्जा के लिए मैपिंग करवाई थी। इसमें खुलासा हुआ कि राज्य में विद्युत उत्पादन की अपार संभावना है। सरकार ने सौर ऊर्जा प्रोत्साहन नीति के तहत कई प्रकार की घोषणा की है।



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अनुपयोगी जमीन (वेस्टलैंड) पर सोलर प्लांट लगाने के लिए सरकार ने पंजीकरण और प्रवेश कर को माफ कर दिया है। ब्रेडा ने अगले पांच वर्षों में करीब ढाई हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने कहा कि नार्वे की कंपनी के प्रस्ताव पर जांच के बाद कोई विचार किया जाएगा।




99533 मेगावाटबिजली का उत्पादन देश में गैर परंपरागत माध्यमों से अगले पांच साल में किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। गैर परंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बीते दिनों केंद्र सरकार के स्तर पर समीक्षा हुई थी, जिसमें तय हुआ था कि अगले पांच साल में देश में 99 हजार 533 मेगावाट बिजली का उत्पादन गैर परंपरागत माध्यमों से किया जाएगा।

इसमें बिहार सरकार को सौर ऊर्जा में 2493 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। वर्ष 2015-16 में सौर ऊर्जा में 266 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया था। ब्रेडा ने इसमें से 105 मेगावाट का लक्ष्य हासिल कर लिया। अप्रैल, 2017 तक इसमें 43 मेगावाट की और वृद्धि होने की संभावना है।




मार्च, 2018 तक गैर परंपरागत ऊर्जा माध्यमों की बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी यानी 576 मेगावाट से अधिक कर ली जाए। वहीं 2022 तक 2500 मेगावाट तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
इतने बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने वाला यह देश का पहला गांव है। यहां 24 घंटे सौर ऊर्जा से बिजली मिलती है।

इसकी देख-रेख का काम ग्राम समिति कर रही है। हालांकि, अभी तकनीकी रूप से हस्तांतरण नहीं हुआ है। यह पायलट प्रोजेक्ट पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस ने तैयार किया है।




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जहानाबाद जिले का धरनई गांव राज्य का पहला सौर ऊर्जा गांव है। इसके पास अपना पावर ग्रिड है। इस गांव में 100 किलोवाट बिजली उत्पादन सौर ऊर्जा से हो रहा है। इनमें 70 किलोवाट बिजली लोगों को घरेलू उपयोग के लिए और 30 किलोवाट सिंचाई के लिए दी जा रही है।



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