नवरात्र में फिर से लगेगा गढ़देवी से मनौती मांगने वाले भक्तों की भीड़, विशेष मान्यता है इस मंदिर की….

आस्था

मढ़ौरा, बिहार के सारण जिला में स्थित एक छोटा शहर है जिसकी आबादी आबादी लगभग 30,000 के आसपास हैं।

यह शहर पहले तो औद्योगिक क्षेत्र था। पूरे देश में ओडिसा के बाद दूसरा चीनी मील की स्थापना 1904 मढ़ौरा में की गई थी। इसके अलावे मोर्टन और शराब की मीले भी थी। पर यहाँ तत्काल अब कोई मील नही चल रहीं। फिर भी यहाँ कुछ ऐसे स्थल है जहाँ लोग आते हैं। उदाहरण के तौर गढ़देवी माता का मंदिर और शिल्हौरी में शंकर भगवान का मंदिर। जहाँ भक्तो की अपार भीड़ होती है।

गढ़देवि माता जी का मंदिर:

गढ़देवी माता के मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना हैं। मढ़ौरा के एक कोने में स्थित , सारण जिले में बेसइस क्षेत्र में एक मंदिर है जो देवी माँ दुर्गा को अर्पित है।

इस मंदिर को गढ़ देवी मंदिर कहते है। मंदिर के इतिहास के अनुसार यह माना जाता है की माँ दुर्गा यहाँ मढ़ौरा में थावे (गोपालगंज) तक की अपनी यात्रा में रुकी थी।

इस मंदिर की यात्रा करने वाले भक्तो को बड़े शहरों की सुविधाये प्राप्त नहीं होती लेकिन गाँव में बसे इस मंदिर की अपनी अलग ही सुंदरता है।

यहाँ गढ़देवी मेले में स्थानीय व्यवसाय करने वाले खिलौने, खाने पिने की वास्तु, अन्य घर की वस्तुए बेचने आते है।

मुख्य देवता

यहाँ देवी माँ दुर्गा को पूजा जाता है।
सोमवार और शुक्रवार के दिन विशेष पूजाएं होती है और इस मंदिर में इन दिनों भक्तो की बोहोत भीड़रहती है। हिंदी में गढ़ का अर्थ है पर्वत, इसीलिए देवी माँ को पर्वत पुत्री भी कहा जाता है। यह शक्ति पीठों में से एक है।

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