तबाही का मंजर

बड़े-बूढ़ों ने कहा- 60 साल बाद देखा ऐसा तबाही का मंजर, आंखों के सामने डूब गए 12 गांव

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छपरा के पानापुर के इलाके में अचानक बराज से पानी छोड़े जाने के बाद तबाही मच गई है। आस-पास के 12 गांवों में बाढ़ का पानी घेर लिया है। जिससे तबाही का मंजर आ गया है।

स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि वैसे तो हर साल गंडक नदी में पानी बढ़ता है। और तटीय इलाके में बसे लोगों को बाढ़ झेलनी पड़ती है। लेकिन ऐसी बाढ़ दशकों बाद आई है। रामपुररुद्र निवासी 75 वर्षीय आंदेव राय ने बताया कि लगभग 60 वर्षों बाद ऐसी बाढ़ आई है।

क्योंकि जब हमलोगों बच्चे थे। तभी नदी का इतना पानी बढ़ा था। गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से तटीय इलाके में बसे एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिससे हजारों लोगों के रहने, खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है।




तबाही का मंजर

प्रखंड के रामपुररुद्र, सारंगपुर, उभवां, मड़वा, बसहियां, सलेमपुर, सोनबरसा, फतेहपुर, पृथ्वीपुर, सरौंजा, भगवानपुर, रामपुररुद्र गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए है। इस गांव के करीब डेढ़ हजार लोग बाढ़ की पानी से घिरे है।वहीं तरैया में बाढ़ का पानी 14 गांवों में प्रवेश कर गया है।जिसमें करीब डेढ़ हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए है।




जो धीरे-धीरे पलायन कर रहे हैं। पानापुर में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले से बाढ़ पीडितों की सुधि नहीं लेने से ग्रामीण आक्रोशित हैं।थाना क्षेत्र के कोंध भगवानपुर गांव में बुधवार को बाढ़ के पानी में डूबने से भगवानपुर गांव निवासी प्रमोद साह के 18 वर्षीय पुत्र प्रेम कुमार की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार युवक मवेशी को खिलाने के लिए चारा लेकर आ रहा था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया। जिससे उसकी मौत हो गया। मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। वहीं घटना के बाद सारण तटबंध पर हजारों लोगों की भीड़ जुट गई।काफी तलाशी के बाद शव बरामद किया गया।




प्रखंड में आई बाढ़ ने अंचल कार्यालय के बाढ़ से पूर्व की जाने वाली तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। बाढ़ पीडितों को नाव भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिससे वे अपने घर से जरूरत के सामान निकालकर सुरक्षित जगह पर जा सकें। कुछ लोग टूटे-फूटे निजी नाव का उपयोग कर घर से सामान के साथ बाढ़ से निकलकर सारण तटबंध पर शरण ले रहे हैं।






पानापुर बीडीओ सह प्रभारी सीओ शशिभूषण साहू ने बताया कि बाढ़ पीडितों को आठ नावें उपलब्ध करा दी गई है। सूखा राशन पैकेट बांटने की तैयारी चल रही है। प्रभावित इलाकों के नजदीक स्थित सरकारी स्कूलों को राहत कैम्प बनाया गया है। कल बाढ़ पीडितों को पॉलिथीन उपलब्ध करा दी जायेगी।

बाढ़ पीडितों ने बताया कि 13 अगस्त की शाम अधिकारियों की फौज आई थी। वे लोग सिर्फ यह कहकर चले गए कि गंडक नदी में पानी छोड़ा गया है। जिससे बाढ़ आने की संभावना है। आपलोग अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थान पर चले जाएं। उसके बाद कोई पूछने भी नहीं आया।




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बाढ का कहर







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