टॉपर का तो इंटरव्यू ले लिया, कभी शिक्षकों और शिक्षा सिस्टम के बाकियों की भी तो खबर लो….

खबरें बिहार की

एक बार फिर गलती छिपाने और बात को दबाने के लिए गलत आदमी को गिरफ्तार करवा दिया गया। गणेश को ऐसा करने में सहायता वाली सरकारी वयवस्था को क्या सजा दी जाएगी?

पिछले साल बिहार बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद जब रूबी राय को आर्ट्स का टॉपर घोसित किया गया तब मीडिया रूबी के घर पहुंची बधाई देने। बात करने के दौरान जब रूबी के मुँह से सब्जेक्ट पोलिटिकल साइंस की जादाग प्रॉडिकल साइंस निकला तो सारा खेल सामने आने लगा।

पिछले साल रूबी का इंटरव्यू लेने पहुंची मीडिया का उद्देश्य रूबी की काबिलियत परखना नहीं था, लेकिन अनजाने में रूबी का सच और बिहार में शिक्षा विभाग और शिक्षा माफिया का सच भी पूरी दुनिया की मीडिया की सुर्ख़ियों में आया। जब बिहार सरकार की किरकिरी और बदनामी शुरू हुई तो जांच के साथ गिरफ्तारियां शुरू हुई।

इससे पहले 2015 में बिहा बोर्ड की परीक्षा में हुई खुली नक़ल भी मीडिया की सुर्खिया बनी रही थी। और फिर देखते ही देखते 2017 आ गया।

इस बार बोर्ड की परीक्षा बहुत ही कड़ाई के साथ पूरी निगरानी में की गई। लेकिन क्या इतना भर ही काफी था ?

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