हिंदू धर्म ग्रंथों में रुद्राक्ष के महत्व की खूब चर्चा की गई हैं हर तरह से रुद्राक्ष को किसी न किसी रूप में लाभकारी बताया गया हैं। वही रुद्राक्ष के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक कुछ धारियां खिंची होती हैं वही इन्हें मुख कहा जाता हैं। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन सा रुद्राक्ष किस तरह से व्यक्ति को लाभ पहुंचाता हैं, तो आइए जानते हैं

वही एकमुखी रुद्राक्ष दुर्लभ माना जाता हैं इसे साक्षात् भगवान शिव बताया गया हैं ऐसा माना जाता हैं कि इसे धारण करने से मनुष्य को यश की प्राप्ति हो जाती हैं।

वही दो मुखी रुद्राक्ष को देवी और देवता, दोनो का स्वरूप माना जाता हैं। इसे धारण करने से कई तरह के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

वही तीन मुखी रुद्राक्ष को अनल यानी की अग्नि. के समान बताया गया हैं। वही चार मुखी रुद्राक्ष को ब्रह्मा का रूप बताया गया हैं इसे धारण करने से ब्रह्म हत्या का पान नष्ट हो जाता हैं। वही पंचमुखी रुद्राख को स्वयं रुद्र कालाग्नि के समान बताया गया हैं वही इसे धारण करने से शांत व संतोष की प्राप्ति होती हैं।

वही छह मुख वाले रुद्राक्ष को कार्तिकेय का रूप माना जाता हैं इसे दाहिने हाथ में पहनना चाहिए। वही सात मुखी रुद्राख को अनंग बताया गया हैं। इसे धारण करने से सोने की चोरी आदि के पाप दूर हो जाते हैं। अष्टमुखी रुद्राख को श्री गणेश का स्वरूप माना गया हैं इसे धारण करने से पाप और अन्य तरह के क्लेश दूर होते हैं।

वही नौ मुखी रुद्राक्ष को भैरव कहा जाता हैं इसे बाईं भुजा में धारण करना शुभ होता हैं वही इसे धारण करने वाले को भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। दशमुखी रुद्राक्ष को जनार्दन या विष्णु का स्वरूप बताया गया हैं इसे धारण करने से व्यक्ति के सभी ग्रह शांत हो जाते हैं और उसे किसी भी तरह का भय नहीं सताता हैं। वही ग्यारह मुखी रुद्राख को साक्षात् रुद्र कहा जाता हैं जो इसे शिखा में धारण करता हैं उसे कई हजार यज्ञ कराने का फल प्राप्त होता हैं

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