रौद्र रूप में बूढ़ी गंडक

रौद्र रूप में बूढ़ी गंडक तबाही मचाने को तैयार, जान बचाने को सब कुछ छोड़ भागे लोग

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रौद्र रूप में बूढ़ी गंडक 

मुजफ्फरपुर में पूरा शहर नींद के आगोश में और शहर से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक नदी पूरी तरह से उफान पर। जैसे रौद्र रूप में हो। जलस्तर हर घंटे में 5 सेमी का बढ़ना। और मौके पर बढ़ता लोगों का हुजूम।

यानी शहर के बाहरी इलाके के बाद अब शहर में बाढ़ की आशंका और लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें। 2007 के बाद 2017 में यानी ठीक 10 साल बाद बूढ़ी गंडक का जवां रूप।

शहर के कर्पूरी नगर और गांधी आश्रम के करीब डेढ़ सौ परिवारों को आगोश में लिया। वह रतजगा करते दिखे। कई परिवार छत पर सीढ़ी के साथ सो रहे थे ताकि आपात स्थिति में पलायन किया जा सके।









बाढ़ के पानी में डूबने से मुजफ्फरपुर जिले में 3 की मौत हो गई, जबकि 3 लापता हैं। बोचहां के सलहा में डूबे चितरंजन सहनी के पुत्र रितिक कुमार (12) का शव मिला। औराई की राजखंड उत्तरी पंचायत में एक बच्चे का शव एनडीआरएफ की टीम ने निकाला। कोकीलबाड़ा के मो. नेयाज की पुत्री नुर सबा (12) का शव पानी में मिला।

दो अन्य डूबे बच्चे मो. इस्लाम की पुत्री दरख्शां परवीन (10), मो. हाशिम की पुत्री मुश्के अंबर (12) लापता हैं। वहीं, नानपुर थाना के मोहनी गांव निवासी मो. आफसाद डूब गया। पारू प्रखंड के ग्यासपुर गांव निवासी विशेश्वर सिंह के पुत्र अमित कुमार (20) की मौत डूबने से हो गई।




बागमती नदी की मुख्यधारा बकुची एवं उपधारा बसघट्टा के जलस्तर में शुक्रवार गिरावट दर्ज की गई। बर्री, बसघट्टा, खंगुरा, चंगेल, पहसौल, बंधपुरा, तेहवारा, बेलपकौना, सोपनुर, कटरा, धनौर, शिवदासपुर आदि पंचायतों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है। वहीं राहत सामग्री वितरण में अनियमितता को लेकर धीरे-धीरे बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश गहराता जा रहा है।

बसघट्टा परियोजना बांध पर शरण लिए वार्ड 6 के गनौर कमती, सिकंदर कमती, शिवशंकर चौधरी, पवन साह जैसे दर्जनों ने बताया कि उनके घर में रखे अनाज, कपड़े समेत अन्य जरूरी सामान बाढ़ के पानी में बह गए है। फिर भी उन्हें अभी तक चूड़ा-नमक पर आफत है, जबकि बांध पर शरण लिए एक सप्ताह बीत गया।




रौद्र रूप में बूढ़ी गंडक




इधर बाढ़ का पानी डुमरी, धोबौली, सहनौली, खुगुरा, बरैठा आदि चौर में जमा होने से डुमरी-पहसौल एवं पहसौल-बसघट्टा पर तीन फीट से ऊपर जमा होने से वाहनों का परिचालन ठप है।

इधर बसघट्टा पुल के ध्वस्त होने से प्रखंड की 14 पंचायतों की करीब दो लाख की आबादी को प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए तीन जगह नाव एवं एक जगह पीपा पुल पर शुल्क देना पड़ रहा है। बर्री के चंदौली में 50 घरों में पानी प्रवेश कर गया है। विमल सहनी विगत एक सप्ताह से चौकी पर अपने परिवार एवं बकरियों के साथ शरण लिए हैं।









विजयी छपरा, मिठनसराय, सोनियापुर के आक्रोशित बाढ़ पीडि़तों ने शुक्रवार को एनएच-57 को जाम कर दिया। संगम घाट के निकट प्रशासनिक कोताही को लेकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि उनके घर में पानी घुस गया है। घर में रखा राशन पानी में डूब गया है। भूखे पेट उनके बच्चे तड़प रहे हैं।

आने-जाने के लिए नाव की व्यवस्था नहीं हुई है। सभी सड़क पर आ गए हैं। दो घंटे तक आक्रोशित लोगों ने सड़क को जाम रखा। वाहनों की लंबी कतार लग गई। पूर्व विधायक ई.अजीत कुमार के पहुंचने पर बाढ़ पीड़ितों ने अपनी समस्या सुनाई। शीघ्र राहत मिलने के आश्वासन पर लोग माने।




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