बहते

ये बंगलों में रहने वाले कोशी के दर्द को क्या समझेंगे, मैंने अपनों को जिंदा बहते देखा है

खबरें बिहार की

बिजली से भी तेज ‘मौत’ आई और लेकर चली गयी ! बात 2008 की है , दिल्ली के टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने पुरे पन्ने पर बिहार के बाढ़ के वीभत्स रूप को लिखा ! तब मेरे बॉस स्व अनिल कुमार यादव होते थे जो की बिहार के कोशी क्षेत्र के रहने वाले थे , कहने लगे – ” रंजन जी , मैंने आँख के सामने कोशी नदी को मेरे अपनो को जिंदा बहते देखा है , ये लुटियन बंगलों में रहने वाले इस दर्द को क्या समझेंगे? ” कोशी

बाढ़ बिहार को लील रहा है ! कहीं कोई उपाय नहीं है ! मौत तो किसी की नहीं होती , क्या गरीब और क्या अमीर ! वाजपेई जी ने रिवर लिंकिंग का सुझाव दिया था !

दरअसल , दिक्कत गैर बिहारी नेता और अफसर में नहीं है – दिक्कत हम बिहारिओं में ही है – गरीबी इस हद तक आत्मा में समाई हुई है की – कंठ की आवाज़ ही रुक गयी है ! सब कुछ में “लाज” लगता है , आवाज़ उठाएंगे तो लोग क्या कहेंगे ? अपनी बीवी तक को बीच बाज़ार में चुम्मा लेने से डरने वाले कल को शक्तिशाली हो भी गए तो – बिहार और बिहार की जनता के पक्ष में क्या आवाज़ उठाएंगे !




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बिहार क्रोस करते ही – बनारस के बाद अपनी बोली बदल लेने वाले दरिद्र क्या आवाज़ उठाएंगे ?
केंद्र सरकार के किस विभाग में सैकड़ों बिहारी नहीं है , कौन सा ऐसा कमरा नहीं है , जहाँ बिहारी नहीं है ! ये 40 सांसद दिल्ली में हवा मिठाई खा के ही खुश हो जाते हैं की हम “डिल्ली” देख लिए , मोदी योगी के साथ फोटो “घींचवा” लिए !
बोली नहीं निकलता है , भीड़ में – बिहारीवाद का झंडा छूने में लाज लगता है !




लजकोकर , मउगा सब का बोली खाली बिहार में गूंजता है – जातिवाद का झंडा ऊँचा करने में !
शर्म आई , लेकिन कहीं से कोई आवाज़ नहीं आई !

बिहार से बाहर बसा तथाकथित बिहारी अपर क्लास का तो पूछिये ही मत ! अभी तो पहला पीढ़ी पढ़ लिख कुछ बोली चाली सीख रहा है – उसको तो बस इसी से मतलब है की कहिया माँ बाप मर जाए तो पटना , दरभंगा वाला फ़्लैट , मकान बेच बिहारी होने का दाग छुडवा ले !

बाकी , कोई सच किसी से नहीं छिपा है ! बैठ कर फेसबुक पर इलीट बनाते रहिये !

साभार- ” Ranjan Rituraj / Daalaan Blog”














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