कलियुग के दानवीर थे दरभंगा के महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह

इतिहास कही-सुनी

दरभंगा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की दानवीरता को पूरा देश जानता है। यही कारण है कि 54 साल बाद भी इनकी छवि मिथिला सहित पूरे देशवासियों के ज़हन में आज भी जीवित है।

दरभंगा महाराजाधिराज ने 1907 में दरभंगा की धरती पर जन्म लिया था और 1962 में उन्होंने अपने शरीर को त्याग दिया।

पर 55 साल के अपने जीवन काल को उन्होंने समाज हित में अपर्ण कर दिया। इसी का परिणाम है कि आज भी मिथिला में वे जीवंत महाराजा के रूप में याद किए जाते हैं। महाराजा ने अपने लक्ष्मेश्वर विलास पैलेस जैसे भव्य भवन को प्राच्य विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए 1961 में दान दे दिया था। एक ही राज परिवार के मदद से एक ही कैंपस में दो विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।





और सबसे खास बात ये है कि पूरे बिहार में शायद ही ऐसा कोई कैंपस होगा जहां एक ही कैंपस में दो-दो विश्वविद्यालय हो। लेकिन, इसके बावजूद इतने दिनों बाद भी ऐसे दानवीर महाराजा की एक भी प्रतिमा कहीं नहीं लगी थी।

इसी को मद्दे नज़र रखते हुए उनकी दानवीरता को स्मरण कर स्मृति तर्पण के रूप में कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ देवनारायण झा ने महाराजा कामेश्वर सिंह की आदम कद प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया।









और अपने इसी निर्णय को आगे बढ़ाते हुए कासिंदसंविवि के द्वारा महाराजा की मूर्ति का निर्माण कराया गया। करीब पांच लाख की लागत से जयपुर में निर्मित महाराजा की साढ़े पांच फीट की रंगीन मूर्ति काफी भव्य है और ये मूर्ति ऐसी है कि इसकी एक झलक पाते ही कोई भी इसे निहारने पर मजबूर हो जाए।

देश व दुनिया भर में अपनी दानवीरता के कारण वर्तमान युग के कर्ण कहलाने वाले महाराज कामेश्वर सिंह की प्रतिमा 27 जून को लगनी थी और इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय भी दे दिया था।



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लेकिन, किसी कारणवश मुख्यमंत्री कार्यालय ने जुलाई माह में दरभंगा के महाराजाधिराज की इस मनमोहिनी मूर्ति को स्थापित करने की अगली तिथी निधार्रित करने की सूचना विवि को दे दी है।

इस मूर्ति के निर्माण में जिन्होंने भी अपना समय, श्रम, चिंतन व अर्थ लगाया है वे सभी धन्यवाद के पात्र हैं। कुलपति देवनारायण झा ने कहा कि संस्कृत विवि के माथे पर एक ऋण था दरभंगा महाराज का जो कि शायद इनकी प्रतिमा लगाने के बाद उतर पाएगा।

साथ ही उनका कहना था कि इस प्रतिमा की स्थापना से राज परिवार, महारानी सहित महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की आत्मा को काफी प्रसन्नता होगी।







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