कभी अशोक चौधरी थे राहुल गांधी के करीबी, भिड़ गये थे पटना के SSP से

राजनीति

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक चौधरी की अप्रिय स्थिति में विदाई हो गयी। 2013 में जब अशोक चौधरी को यह जिम्मावारी सौंपी गयी थी तब उन्हें राहुल गांधी का भरोसेमंद बताया गया था।

अब जब उन्हें पद से हटाया गया है तो उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी बताया जा रहा है।

अशोक चौधरी 2015 में सब विवादों आ गये थे जब वे पटना के एसएसपी विकास वैभव के साथ भिड़ गये थे।
विकास वैभव ने अशोक चौधरी पर आरोप लगाया था उन्होंने कांग्रेस से जुड़े आरोपियों को बचाने के लिए उनको फोन किया था।

इसके बाद विकास वैभव ने तत्कालीन बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी के खिलाफ गांधी मैदान थाना में सनहा दर्ज करा दिया गया था।

इस आरोप के बाद अशोक चौधरी भड़क गये थे। उन्होंने कहा था कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने एसएसपी से केवल इतना निवेदन किया था कि मामले की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।

क्या यह कहना गुनाह है? एसएसपी ने तो मेरे खिलाफ सनहा ही दर्ज कर लिया । उन्होंने तब बिहार विधान परिषद में एसएसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की धमकी दी थी।

दरअसल ये मामला 2013 का है। 22 जुलाई 2013 को NSUI के कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री पीके शाही के आवास के बाहर तोड़फोड़ और हंगामा किया था।

इस मामले में सचिवालय थाना में नामजद और अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कराया गया था। तत्कालीन दारोगा ने जांच के बाद इस आरोप को असत्य करार दिया था।

कुछ समय बाद पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की दोबारा जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। जब विकास वैभव पटना के SSP बने तो उन्होंने इस निर्देश पर काम करना शुरू किया।

कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक चौधरी को जब ये बात मालूम हुई तो उन्होंने SSP को फोन किया था। अशोक चौधरी के तेवर दिखाने के बाद भी विकास वैभव ने सख्ती जारी रखी।

तब उन्होंने कहा था कि जो कानून तोड़ेगा उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। जिस पार्टी के लिए अशोक चौधरी कभी IPS औफिसर से भिड़ गये थे आज उसी ने उनके इरादों पर शक किया।

अशोक चौधरी अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। उन पर कांग्रेस के 27 विधायकों में विभाजन की कोशिश का आरोप है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.