आस्था के नाम पर हिंसा कतई बर्दाश्त नही की जायेगी-नरेन्द्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कल मन की बात कार्यक्रम मे स्‍पष्‍ट कहा है कि आस्‍था के नाम पर हिंसा कतई बर्दाश्‍त नहीं की जाएगी। आस्‍था के नाम पर किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उन्‍होंने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आम्‍बेडकर ने जो संविधान दिया है, उसमें हर व्‍यक्ति को न्‍याय दिलाने की पूरी व्‍यवस्‍था की गई है।

आज यहां आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम मे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा कि देशवासियों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी चाहे वो व्‍यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्‍त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्‍त करेगी।

हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा । कानून जवाबदेही तय करेगा और दोषितों को सजा देकर रहेगा।भारत को बुद्ध, गांधी और सरदार पटेल का देश बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सदियों से सामुदायिक और अहिंसा के मूल्‍य अपने जीवन में अपनाये हैं और एक-दूसरे को सम्‍मान दिया है।

उन्होने कहा कि पर्यावरण के प्रति सजगता ही आधुनिकता का बड़ा पैमाना है। इसी नई सोच का नतीजा है कि आज गणेश उत्‍सव को भी पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाने की मुहिम चल पड़ी है।इस बार गांधी जयंती से पहले 15 सितंबर से स्‍वच्‍छता ही सेवा मुहिम चलाई जाए और देश में स्‍वच्‍छता के लिए एक आदर्श माहौल तैयार किया जाए।

उन्‍होंने गांधी जयंती को स्‍वच्‍छ दो अक्‍तूबर दिवस मनाने का संकल्‍प लेने का आह्वान किया। तीन वर्ष पहले 2 अक्‍तूबर को जो स्‍वच्‍छता अभियान शुरू किया गया था, उसके सकारात्‍मक परिणाम नजर आने लगे हैं।

तीन वर्ष पूर्व जब स्‍वच्‍छता का अभियान प्रारंभ किया था, 2 अक्‍तूबर को उसको तीन साल हुए है और उसके सकारात्‍मक परिणाम नजर आ रहे हैं। शौचालयों की कवरेज 39 प्रतिशत से करीब करीब 67 परसेन्‍ट पहुंची है। दो लाख तीस हजार से भी ज्‍यादा गांव खुले में शौच से अपने आपको मुक्‍त घोषित कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में, गुजरात के बनासकांठा के धानेरा गांव में आई बाढ़ की एक घटना का उल्‍लेख किया और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के उन कार्यकर्ताओं की सराहना की जिन्‍होंने बाढ़ प्रभावित 22 मंदिरों और तीन मस्जिदों की साफ-सफाई में सक्रिय योगदान दिया तथा देश के सामने स्‍वच्‍छता के लिए एकता का प्रेरक उदाहरण पेश किया।

उन्होने कहा कि देश में त्‍यौहारों के माहौल का उल्‍लेख करते हुए कहा कि त्‍यौहार हमारे लिए आस्‍था और विश्‍वास के प्रतीक हैं, हमें इन त्‍यौहारों को स्‍वच्‍छता का भी प्रतीक बनाना है।
हमे नए भारत में त्‍यौहारों को स्‍वच्‍छता का भी प्रतीक बनाना है।

पारिवारिक जीवन में तो त्‍यौहार और स्‍वच्‍छता जुड़े हुए हैं । त्‍यौहार की तैयारी का मतलब है साफ सफाई । ये सामाजिक स्‍वभाव बनाना भी जरूरी है । सार्वजनिक रूप से स्‍वच्‍छता का आग्रह सिर्फ घर में नहीं हमारे पूरे गांव में, पूरे नगर में, पूरे शहर में, हमारे राज्‍य में, पूरे देश में स्‍वच्‍छता ये त्‍यौहारों के साथ एक अटूट हिस्‍सा बनना ही चाहिए।

उन्होने देशवासियों से अपील की कि उन्‍हें छोटे कारोबारी और कड़ी मेहनत करने वालों का सम्‍मान और उनके श्रम का उचित भुगतान देना चाहिए।

किसी गरीब से अपना नाता आ जाए तो मोलभाव किए बिना रहते नहीं है। गरीब के मन को क्‍या होता है, ये आपने कभी सोचा है उसके लिए सवाल दो रूपये, पांच रूपये का नहीं है, उसके हृदय को चोट पहुंचती है । आपने वो गरीब है, इसलिए उसकी ईमानदारी पर शक किया है।

दो रूपया, पांच रूपया आपके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन आपकी यह छोटी सी आदत उसके मन को कितना गहरा धक्‍का लगाती होगी कभी सोचा है। मुझे विश्‍वास है कि मेरे देशवासी की किसी गरीब के साथ ऐसा व्‍यवहार करने की आदत होगी तो जरूर छोड़ देंगे।

श्री मोदी ने महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्‍यानचंद का स्‍मरण करते हुए युवा पीढ़ी को खेलों के क्षेत्र में आगे आने को कहा। उन्‍होंने खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए शुरू किये गये खेल मंत्रालय के पोर्टल का उल्‍लेख करते हुए कहा कि प्रतिभावान खिलाडि़यों को इसका पूरा उपयोग करना चाहिए।

खेल मंत्रालय ने खेल प्रतिभा की खोज और उन्‍हें निखारने के लिए एक स्‍पोटर्स टेलेंट सर्च पोर्टल तैयार किया है। जहां पूरे देश से कोई भी बच्‍चा जिसने खेल के क्षेत्र में कुछ उपलब्धि हासिल की है उनमें टेलेंट हो, वो इस पोर्टल पर अपना बॉयोडाटा या वीडियो अपलोड कर सकता है।

सिलेक्टिड इमरजिंग प्‍लेयरस को खेल मंत्रालय ट्रेनिंग देगा और मंत्रालय कल ही इस पोर्टल को लांच करने वाला है।
प्रधानमंत्री ने महिलाओं और लड़कियों को खेल और साहसिक गतिविधियों के लिए आगे आने का विशेष रूप से आह्वान किया।

5 सितम्‍बर को शिक्षक दिवस का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से राष्‍ट्र में बदलाव लाने के लिए छात्रों में सृजनात्‍मक भाव और ज्ञान का अलख जगाने को कहा। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. राधा कृष्‍णन का स्‍मरण करते हुए उन्होने कहा कि बदलाव लाने में शिक्षक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

ट्रांसफोरमेशन में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका रहती है। हर शिक्षक के जीवन में कहीं न कहीं ऐसी घटनाएं हैं, जिसके सहज प्रयासों से किसी की जिंदगी के ट्रांसफोरमेशन में सफलता मिली हो। अगर हम सामूहिक प्रयास करेंगे राष्‍ट्र के ट्रांसफोरमेशन में हम बहुत बड़ी भूमिका अदा करेंगे। आइए टीच टू ट्रांसफोर्म इस मंत्र को लेकर के चल पड़े।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन धन योजना की बात करते हुए 28 अगस्‍त 2014 को शुरू हुई इस योजना के तीन साल के दौरान तीस करोड़ नये परिवारों ने अपने बैंक खाते खोले हैं। इन खातों में कमजोर वर्ग के लोगों ने 64 हजार करोड़ रूपये जमा कराये हैं।

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