..अब खुद ही बिक रही Flipkart, वॉलमार्ट कर रहा इतने करोड़ की डील

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भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी फ्लिपकार्ट बिक गई है. क्या यह खबर सही है. सूत्रों की मानें तो ऐसा होने जा रहा है. फ्लिपकार्ट के प्रमुख शेयरहोल्डर अपना हिस्सा बेचने को तैयार हो गए हैं. हालांकि, अभी तक संश्य था की फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर कंपनी सॉफ्टबैंक अपने हिस्सा बेहतर प्राइस में बेचती है.

लेकिन, सूत्रों की मानें तो अब सहमति बन चुकी है. सॉफ्टबैंक भी अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट को अपना हिस्सा बेचने पर राजी हो गई है. हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. फ्लिपकार्ट ने भी इस संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है.

वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील के बाद भारत में अमेजन का प्रभुत्व कम हो जाएगा और उसे वॉलमार्ट की कड़ी टक्कर मिलेगी। वॉलमार्ट 1.3 बिलियन लोगों की बढ़ती मार्केट पर पकड़ बनाना चाहता है और डिजिटल मार्केट में अपनी साख मजबूत करने की कोशिश में है।

कहा जा रहा है कि फ्लिपकार्ट के वर्तमान सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति अपने पद पर बने रहेंगे। लेकिन फ्लिपकार्ट के फाउंडर सचिन और बिन्नी बंसल के बारे में अभी कोई खबर नहीं आई है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो दोनों को-फाउंडर डील के बाद बाहर निकल आएंगे।

लगभग एक महीने चली लंबी बातचीत के बाद इंडियन ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अपने 75 प्रतिशत शेयर अमेरिकी रीटेल कंपनी वॉलमार्ट को बेचने की अनुमति दे दी है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सौदा 15 बिलियन डॉलर यानी दस हजार करोड़ रुपये में यह सौदा तय हुआ है। फ्लिपकार्ट में सॉफ्टबैंक, टाइगर ग्लोबल, नेस्पर जैसे 50 से ज्यादा इन्वेस्टर्स हैं।

बताया जा रहा है कि सॉफ्टबैंक फ्लिपकार्ट की अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देगा। हालांकि टेंसेंट, माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल जैसे इन्वेस्टर पूरी तरह से कंपनी से बाहर नहीं होंगे। यानी वे अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के मूड में नहीं हैं।

 

रिपोर्ट के मुताबिक गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट भी इस डील में हिस्सा लेगी और लगभग 3 बिलियन डॉलर की डील करेगी। अभी इस डील के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले 10 दिनों में यह फाइनल हो जाएगा। फ्लिपकार्ट के बिक जाने के बाद कंपनी की देखरेख करने वाले अधिकारियों में भी बदलाव होगा।

कहा जा रहा है कि फ्लिपकार्ट के वर्तमान सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति अपने पद पर बने रहेंगे। लेकिन फ्लिपकार्ट के फाउंडर सचिन और बिन्नी बंसल के बारे में अभी कोई खबर नहीं आई है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो दोनों को-फाउंडर डील के बाद बाहर निकल आएंगे।

वॉलमार्ट के अलावा अमेजन भी फ्लिपकार्ट को खरीदने की फिराक में था, लेकिन बात बन नहीं पाई। फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने अमेजन की डील स्वीकार नहीं की। वॉलमार्ट पहले भी भारत में ऑनलाइन सेक्टर में अपने पैर जमाने की कोशिश कर चुका है, लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी। अमेजन का सालाना रेवेन्यू 177 बिलियन डॉलर के आसपास है वहीं वॉलमार्ट का सालाना रेवेन्यू 480 डॉलर का है।

लेकिन अमेजन अपनी सारी कमाई डिजिटल मीडियम से करता है वहीं वॉलमार्ट इस मामले में इसका 3 प्रतिशत है। पहले कहा जा रहा था कि अमेजन फ्लिपकार्ट को खरीदकर भारतीय ईकामर्स बाजार पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।

वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील के बाद भारत में अमेजन का प्रभुत्व कम हो जाएगा और उसे वॉलमार्ट की कड़ी टक्कर मिलेगी। वॉलमार्ट 1.3 बिलियन लोगों की बढ़ती मार्केट पर पकड़ बनाना चाहता है और डिजिटल मार्केट में अपनी साख मजबूत करने की कोशिश में है।

अमेरिका और चीन के बाद भारत के ग्राहक ऑनलाइन मार्केट में सबसे ज्यादा हैं। अगर वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट की डील सक्सेस होती है तो वॉलमार्ट को कस्टमर्स डेटा, कंपनी की इंजीनियरिंग टीम और 4 लाख से भी अधिक वेंडर और सप्लाई चेन भी मिल जाएगी।

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